Last updated: July 17th, 2026 at 11:32 am

बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इन दिनों लगातार आंतरिक चुनौतियों का सामना करता दिखाई दे रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी, हालिया इस्तीफों और उपचुनाव के बीच उठे विवादों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हाल ही में पार्टी के लंबे समय से जुड़े प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने RJD की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के दौरान उन्होंने पार्टी में सम्मान की कमी और आंतरिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी शिकायतें पार्टी नेतृत्व तक भी पहुंचाईं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस बीच बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी पार्टी के भीतर अलग-अलग स्वर सुनाई दिए। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए और महागठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। इससे विपक्षी दलों को RJD पर निशाना साधने का अवसर मिल गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से RJD के कई नेताओं के अलग रुख और पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति संगठन के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इन घटनाओं पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं, विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि RJD के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर आगामी चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह एक आंतरिक मामला है और संगठन समय आने पर सभी मुद्दों का समाधान करेगा।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि RJD नेतृत्व इन राजनीतिक घटनाक्रमों से कैसे निपटता है और क्या पार्टी एकजुट होकर आगामी चुनावी चुनौतियों का सामना कर पाती है।
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