Last updated: July 17th, 2026 at 03:48 pm

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने राजधानी की रोहिणी और तिहाड़ जेलों में चल रहे कथित रिश्वत और रंगदारी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक सहायक जेल अधीक्षक, छह वार्डर, दो वकील और दो निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार यह गिरोह विचाराधीन कैदियों और उनके परिजनों से सुरक्षा, बेहतर सुविधाएं और विशेष व्यवहार दिलाने के नाम पर अवैध वसूली करता था।
एसीबी के अनुसार मामले की शुरुआत इसी वर्ष फरवरी में एक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रोहिणी जेल में बंद उसके परिजनों की सुरक्षा और सुविधा के नाम पर उससे नियमित रूप से पैसे मांगे जा रहे थे। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने प्रारंभिक जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर मामला दर्ज कर विशेष जांच टीम गठित की। जांच के दौरान अधिकारियों ने जाल बिछाकर कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरोह के कुछ सदस्यों को पकड़ा। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल एक या दो लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें जेल प्रशासन से जुड़े कर्मचारी, कुछ वकील और बाहरी व्यक्ति भी कथित रूप से शामिल थे। एसीबी का कहना है कि कैदियों के परिजनों से वसूली गई रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा कराई जाती थी और बाद में नकद निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांटी जाती थी। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और मोबाइल फोन के रिकॉर्ड के आधार पर एजेंसी ने पूरे नेटवर्क की पहचान की।
अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार लोगों में रोहिणी जेल के एक सहायक अधीक्षक, कई वार्डर, दो अधिवक्ता तथा दो निजी व्यक्ति शामिल हैं। एसीबी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ कैदियों को तंबाकू जैसी प्रतिबंधित वस्तुएं उपलब्ध कराने और विशेष सुविधाएं देने के बदले भी कथित रूप से रिश्वत ली जाती थी। हालांकि इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कहा है कि मामले में धन के पूरे प्रवाह (मनी ट्रेल) की जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या इस नेटवर्क से और लोग जुड़े हुए थे। जांच अधिकारियों के अनुसार बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण जारी है। यदि आगे और साक्ष्य मिलते हैं तो अतिरिक्त गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
कानूनी और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों के भीतर यदि इस प्रकार के संगठित नेटवर्क सक्रिय हों तो इससे सुधारात्मक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उनका कहना है कि जेल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय लेनदेन पर निगरानी रखने और नियमित आंतरिक ऑडिट जैसे कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने जेलों में डिजिटल निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और मजबूत करने की भी आवश्यकता बताई है।
सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। एसीबी ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का कहना है कि जेलों में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के किसी भी नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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