Last updated: July 21st, 2026 at 03:00 pm
बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। अब दूसरे राज्यों में पंजीकृत डॉक्टरों और नर्सिंग पेशेवरों को बिहार में सेवाएं देने के लिए लंबी री-रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। इस संबंध में विधानसभा में पेश किए गए दो महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन की मंजूरी मिल गई है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बताया कि नए प्रावधानों का उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना है। पहले किसी अन्य राज्य में पंजीकृत चिकित्सक को बिहार में प्रैक्टिस शुरू करने से पहले स्थानीय मेडिकल काउंसिल में अलग से पंजीकरण कराना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त जरूरत पड़ती थी।
नई व्यवस्था के तहत अब बाहर से आने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग प्रोफेशनल्स को केवल अपने वैध पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। संबंधित प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद उनका पंजीकरण पूरा माना जाएगा और वे बिहार में चिकित्सा सेवाएं दे सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से चिकित्सा क्षेत्र में दक्ष मानव संसाधन की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक बदलाव आएगा।
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