Last updated: September 9th, 2026 at 09:54 am

पटना: बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) में अंदरूनी सियासी खींचतान लगातार जारी है। पार्टी के मौजूदा MLC और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के समर्थन को लेकर मोकामा विधायक अनंत सिंह के अलग रुख ने नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी स्तर पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बावजूद फिलहाल अनंत सिंह के रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
पार्टी कार्यालय में हुई बंद कमरे में बैठक
विवाद को सुलझाने की कोशिश के तहत 7 सितंबर को अनंत सिंह और JDU MLC नीरज कुमार ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के साथ बंद कमरे में करीब 35 मिनट तक बैठक की। माना गया कि बैठक में पटना स्नातक सीट को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद पर चर्चा हुई और चुनाव से पहले स्थिति संभालने का प्रयास किया गया।
बैठक के बाद अनंत सिंह बिना मीडिया से बातचीत किए पार्टी कार्यालय से निकल गए। वहीं नीरज कुमार ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि अनंत सिंह ने पहले क्या कहा था। उन्होंने सवाल किया कि आज अनंत सिंह ने उनके खिलाफ कुछ कहा है क्या और दावा किया कि वह उनके समर्थन में हैं।
अनुज सिंह के साथ फिर नजर आए अनंत सिंह
बैठक के बाद भी अनंत सिंह के रुख में बदलाव नजर नहीं आया। मंगलवार शाम वह डॉ. अनुज सिंह के साथ बिहटा पहुंचे, जहां स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जगदीश सिंह की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी।
कार्यक्रम के दौरान अनुज सिंह ने चुनाव को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्हें ‘दादा’ यानी अनंत सिंह का आशीर्वाद और समर्थन मिल चुका है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें जनता के समर्थन की जरूरत है और वह चुनाव जरूर लड़ेंगे।
नीरज कुमार की राह में बढ़ सकती है चुनौती
अनंत सिंह का लगातार अनुज सिंह के साथ खड़ा होना नीरज कुमार के लिए राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। इससे पटना स्नातक सीट के चुनावी समीकरण को लेकर JDU के भीतर चर्चा तेज हो गई है।
एक ओर पार्टी के मौजूदा MLC और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार हैं, जबकि दूसरी ओर अनंत सिंह डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल दो नेताओं के बीच मतभेद तक सीमित न रहकर चुनावी रणनीति का मुद्दा बनता जा रहा है।
JDU नेतृत्व के सामने अब बड़ा सवाल
पार्टी की बैठक के बावजूद अनंत सिंह के रुख में बदलाव नहीं आने से JDU नेतृत्व के सामने चुनौती बनी हुई है। अब सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व उन्हें नीरज कुमार के समर्थन में लाने में सफल होगा या पटना स्नातक सीट पर यह अंदरूनी मतभेद आगे भी जारी रहेगा।
फिलहाल घटनाक्रम से इतना जरूर संकेत मिलता है कि बैठक के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश के बावजूद पटना स्नातक सीट को लेकर JDU में खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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