Last updated: July 22nd, 2026 at 11:54 am

बिहार के सरकारी अस्पतालों में गुरुवार को स्वास्थ्य सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं। अरवल जिले में सिविल सर्जन के साथ हुई कथित मारपीट की घटना के विरोध में कई जिलों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। इसका असर सासाराम समेत कई सरकारी अस्पतालों में देखने को मिला, जहां मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
सासाराम के सदर अस्पताल सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सुबह से ही ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण अस्पतालों के ओपीडी कक्ष खाली नजर आए, जबकि बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। हड़ताल की पूर्व सूचना नहीं होने से दूर-दराज के क्षेत्रों से आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
केवल ओपीडी ही नहीं, बल्कि कई अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच और फिजियोथेरेपी जैसी सेवाएं भी प्रभावित रहीं। इससे नियमित जांच और उपचार कराने पहुंचे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि अरवल में सिविल सर्जन के साथ हुई घटना बेहद गंभीर है और जब तक आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उनका कहना है कि चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़े इस असर के चलते मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ा। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त होने पर टिकी हुई है।
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