Last updated: July 26th, 2026 at 11:56 am

बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में पेशी के बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों के लिए बेउर केंद्रीय कारागार भेजने का आदेश दिया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने तेज प्रताप यादव को पटना के सिटी मॉल के समीप हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें नौबतपुर थाना ले जाया गया, जहां देर रात तक पूछताछ की गई। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस कार्रवाई पर तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने सवाल उठाते हुए दावा किया कि गिरफ्तारी बिना किसी वैध आधार के की गई। उनका कहना है कि उनके मुवक्किल को 25 जुलाई को हिरासत में लिया गया, जबकि संबंधित एफआईआर 26 जुलाई को दर्ज की गई। उन्होंने अदालत से तत्काल रिहाई की मांग भी की, हालांकि कोर्ट ने फिलहाल नियमित जमानत के लिए अलग से आवेदन करने की सलाह दी।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि नौबतपुर थाना पहुंचने पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों से गिरफ्तारी का आधार और एफआईआर की प्रति मांगी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस मामले में जनशक्ति जनता दल की नेता वीणा मानवी ने भी पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को गिरफ्तारी करनी ही थी तो यह कार्रवाई दिन के समय की जा सकती थी। उनके अनुसार देर शाम की गई गिरफ्तारी लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
बताया जा रहा है कि तेज प्रताप यादव हाल ही में छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। शुरुआत में पुलिस की ओर से उनके खिलाफ दर्ज मामले और हिरासत की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई थी। बाद में अदालत में पेशी के बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि तेज प्रताप यादव की ओर से सोमवार को नियमित जमानत याचिका दायर किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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