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सीवान AK-47 फायरिंग मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई की जांच की उठी मांग

बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित AK-47 से हवाई फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया
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बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित AK-47 से हवाई फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इस मामले में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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    याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार बंद के दौरान छात्रों के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया। साथ ही 20 जुलाई से विभिन्न राज्यों में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग के मामलों में एफआईआर दर्ज करने और जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है।

    इस बीच, वायरल वीडियो सामने आने के बाद बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए AK-47 से हवाई फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है। पुलिस के अनुसार, निलंबित जवान की पहचान एसआईटी में तैनात अभिषेक पटेल के रूप में हुई है। विभागीय जांच जारी है और यदि जांच में अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के दौरान बड़ी संख्या में छात्र सीवान के गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन कर रहे थे। हालात बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस अधिकारियों, जवानों और कुछ पत्रकारों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

    सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और किसी भी पक्ष की ओर से अनावश्यक बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि यदि कहीं पुलिस कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और भविष्य के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार किया जाना आवश्यक है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलनों से जुड़े विभिन्न राज्यों के मामलों को व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाएगा। अदालत ने छात्र प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग से संबंधित सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सुनने का निर्णय लिया है। इन मामलों पर अब निर्धारित तिथि को संयुक्त सुनवाई होगी।

     

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