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जंतर-मंतर लाठीचार्ज विवाद: सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार समेत 8 राज्यों से मांगा जवाब

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और आंसूगैस के इस्तेमाल से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और आंसूगैस के इस्तेमाल से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए बिहार समेत आठ राज्यों को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

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    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में हालात कैसे बिगड़े, इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या पुलिस की ओर से आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया या फिर कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हिंसा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान बल प्रयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी के हथियारों के साथ मौजूद थे और उन्होंने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का इस्तेमाल किया।

    याचिका में मामले की स्वतंत्र जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों की डिजिटल पहचान कर सार्वजनिक किए जाने पर रोक लगाने की भी अपील की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और नाबालिग भी शामिल थे।

    सुनवाई के दौरान बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि वहां नाबालिग बच्चों को भी हिरासत में लिया गया था। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एक अन्य व्यक्ति के कथित उत्पीड़न का मामला भी अदालत के समक्ष रखा, जिसे सॉलिसिटर जनरल ने अलग विषय बताया।

    सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, असम, केरल और गुजरात सरकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन फिलहाल किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई करने से परहेज किया जाए।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाओं में लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसूगैस के इस्तेमाल से लोगों के घायल होने, कुछ की आंखों को नुकसान पहुंचने और मीडिया कर्मियों के चोटिल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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