Last updated: September 18th, 2026 at 08:31 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर बिहार में आयोजित दीपोत्सव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने इस आयोजन का बचाव किया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाई जाती है, तो नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने को लेकर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
संतोष सुमन ने कहा कि जन्मदिन मनाने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। उनके मुताबिक, भारतीय परंपरा में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में किसी के जन्मदिन पर दीप जलाना सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखा जा सकता है।
‘मोमबत्ती की जगह दीप जलाना भी एक तरीका’
मंत्री ने कहा कि आज के दौर में जन्मदिन पर केक काटना और मोमबत्ती बुझाना आम परंपरा बन गई है। उनका कहना है कि आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने के साथ भारतीय परंपराओं को भी महत्व दिया जा सकता है।
संतोष सुमन के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने का उद्देश्य सांस्कृतिक भावनाओं को व्यक्त करना है। उन्होंने इसे राजनीतिक विवाद के बजाय परंपरा और शुभकामनाओं से जोड़कर देखने की बात कही।
नेहरू का उदाहरण देकर विपक्ष से सवाल
संतोष सुमन ने अपने बयान में जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीपोत्सव आयोजित किए जाने पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दीपोत्सव और ‘आशीर्वाद का दीया’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य में यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की घोषणा की गई थी।
गया में संतोष कुमार सुमन ने खुद भी दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। वहीं, दीपोत्सव को लेकर विपक्ष की ओर से अलग-अलग सवाल भी उठाए गए हैं। ऐसे में संतोष सुमन का बयान इस मुद्दे पर जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
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