Last updated: July 28th, 2026 at 05:46 pm

बिहार में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी है कि यदि NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया, तो 30 जुलाई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस बयान के बाद बिहार में परीक्षा विवाद को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
NEET परीक्षा से जुड़े कथित विवाद और अनियमितताओं को लेकर बिहार में छात्रों और युवाओं के बीच पहले से ही नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। छात्रों का तर्क है कि वे कई वर्षों तक मेहनत और तैयारी करने के बाद परीक्षाओं में शामिल होते हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि छात्रों के आंदोलन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो 30 जुलाई से व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों को राहत देने की घोषणा भी सामने आ चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने 26 जुलाई की शाम तक दर्ज किए गए NEET प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार ने आंदोलन को शांत करने और छात्रों को राहत देने की दिशा में कदम उठाया है।
इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि बिहार में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। राज्य में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता या विवाद का सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को छात्रों की शिकायतों का समाधान बातचीत और पारदर्शी जांच के माध्यम से करना चाहिए। उनका तर्क है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पर जोर दिया जाता रहा है।
परीक्षा विवाद के बीच छात्र संगठनों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना, कथित अनियमितताओं की जांच करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना शामिल है। छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी तक पूरी प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता है।
इस विवाद का असर बिहार की राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। तेजस्वी यादव के आंदोलन की चेतावनी से सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। यदि प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद जारी रहते हैं, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।
हालांकि, सरकार द्वारा मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की घोषणा के बाद आंदोलन की दिशा पर नजर बनी हुई है। अब मुख्य सवाल यह है कि सरकार के फैसले के बावजूद क्या छात्र संगठन अपनी अन्य मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे या बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
NEET विवाद को लेकर बिहार में राजनीतिक और छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज हैं। तेजस्वी यादव की 30 जुलाई से आंदोलन की चेतावनी और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों को राहत देने के फैसले के बीच आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है। छात्रों की मांगों पर सरकार की आगे की कार्रवाई और आंदोलनकारी संगठनों की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की अगली दिशा तय करेगी।
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