Last updated: July 29th, 2026 at 03:57 pm

दिल्ली में स्ट्रीट वेंडर्स से जुड़ी टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) के चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह मामला टाउन वेंडिंग कमेटी में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े विवाद के बीच सामने आया था। अदालत के फैसले के बाद राजधानी में स्ट्रीट वेंडर्स से संबंधित स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन स्ट्रीट वेंडर्स से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने और उनके अधिकारों तथा आजीविका से संबंधित मुद्दों पर काम करने के लिए किया जाता है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर छोटे व्यवसाय और दुकानें चलाकर अपनी आजीविका कमाते हैं। ऐसे में टाउन वेंडिंग कमेटियों की भूमिका उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मामले में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद उस समय सामने आया जब कमेटी में OBC आरक्षण से संबंधित सवाल उठाए गए। याचिका के माध्यम से चुनाव पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस स्तर पर चुनाव प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया। इससे संबंधित चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
अदालत के इस फैसले के बाद अब दिल्ली में टाउन वेंडिंग कमेटी के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि, आरक्षण से जुड़ा विवाद और उससे संबंधित कानूनी मुद्दे अपनी जगह बने रह सकते हैं। चुनाव प्रक्रिया के दौरान संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन करना आवश्यक होगा।
स्ट्रीट वेंडर्स के लिए टाउन वेंडिंग कमेटियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके माध्यम से वेंडिंग जोन, लाइसेंस, पहचान और सार्वजनिक स्थानों पर कारोबार से जुड़े मुद्दों को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाता है। दिल्ली में फुटपाथ, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कारोबार करने वाले हजारों छोटे विक्रेताओं की आजीविका इन व्यवस्थाओं से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।
राजधानी में स्ट्रीट वेंडिंग को लेकर लंबे समय से कई तरह की चुनौतियां सामने आती रही हैं। एक ओर प्रशासन के सामने यातायात और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी होती है, वहीं दूसरी ओर स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका और उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा करना भी जरूरी होता है। टाउन वेंडिंग कमेटी इसी संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अदालत के फैसले से चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक की संभावना समाप्त हो गई है। अब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के सामने चुनाव को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। चुनाव के बाद गठित कमेटी राजधानी में स्ट्रीट वेंडिंग से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों पर निर्णय लेने और प्रशासन के साथ समन्वय करने में भूमिका निभा सकती है।
OBC आरक्षण को लेकर उठे विवाद के कारण यह मामला सामाजिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आरक्षण से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित करना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए आवश्यक होगा। संबंधित पक्षों की ओर से उठाए गए कानूनी सवालों का समाधान भी आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब स्ट्रीट वेंडर्स और स्थानीय प्रशासन की नजर चुनाव प्रक्रिया पर बनी हुई है। यदि चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होते हैं, तो नई टाउन वेंडिंग कमेटी के गठन के बाद स्ट्रीट वेंडिंग से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा टाउन वेंडिंग कमेटी के चुनाव पर रोक लगाने से इनकार किए जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला दिल्ली के हजारों स्ट्रीट वेंडर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई कमेटी के गठन के बाद उनके वेंडिंग अधिकारों, लाइसेंस और अन्य स्थानीय मुद्दों से जुड़े मामलों पर काम आगे बढ़ सकता है।
![]()
Comments are off for this post.