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44वीं बार रक्तदान कर बनीं मिसाल: जम्मू-कश्मीर की ‘ब्लड वुमन’ बिल्कीस आरा ने लोगों से की आगे आने की अपील

जम्मू-कश्मीर की समाजसेवी और आशा (ASHA) हेल्थ वर्कर बिल्कीस आरा ने एक बार फिर मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते
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जम्मू-कश्मीर की समाजसेवी और आशा (ASHA) हेल्थ वर्कर बिल्कीस आरा ने एक बार फिर मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए 44वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान किया। “ब्लड वुमन” के नाम से पहचान बना चुकी बिल्कीस लगातार लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रही हैं और उनका मानना है कि एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद की जान बचा सकता है।

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    श्रीनगर के उजाला अमनदीप अस्पताल में रक्तदान के बाद बिल्कीस आरा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि तीन बच्चों की मां होने के बावजूद वह नियमित रूप से रक्तदान कर सकती हैं, तो स्वस्थ युवा और अन्य लोग भी बिना किसी डर के इस अभियान से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान से जुड़ी कई भ्रांतियां आज भी लोगों के मन में हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है।

    बिल्कीस ने बताया कि रक्तदान की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार की एक आपातकालीन स्थिति से मिली थी। उन्होंने याद करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में उन्होंने पहली बार अपनी गंभीर रूप से बीमार चचेरी बहन के लिए रक्तदान किया था। शुरुआत में उन्हें भी डर था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनके रक्तदान से एक जान बची, तभी उन्होंने इसे जीवनभर का मिशन बना लिया।

    तब से वह लगातार रक्तदान के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चला रही हैं। उनका सपना है कि हर परिवार में कम से कम एक नियमित रक्तदाता जरूर हो, ताकि किसी मरीज को समय पर खून की कमी का सामना न करना पड़े।

    बिल्कीस आरा की इस उपलब्धि की स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने सराहना की है। उनका समर्पण जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है। उनका मानना है कि स्वैच्छिक रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

     

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