Last updated: August 4th, 2026 at 08:51 am

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया कंपनी Meta का समर्थन करते हुए कहा कि कंपनी को किसी भी तरह के दबाव में आकर माफी नहीं मांगनी चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि एक तकनीकी गलती को अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
संसदीय समिति के सामने पेश हुए Meta के अधिकारी
इस मामले को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के समक्ष Meta के अधिकारियों को बुलाया गया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट हटने की घटना और कंपनी की कंटेंट मॉडरेशन नीति पर विस्तार से सवाल पूछे गए।
कंपनी के प्रतिनिधियों ने समिति को बताया कि संबंधित पोस्ट तकनीकी कारणों से अस्थायी रूप से हट गई थी, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया। साथ ही कंपनी ने इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगने की इच्छा भी जताई।
कंटेंट मॉडरेशन नीति पर उठे सवाल
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने Meta की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई प्रश्न उठाए। सदस्यों ने पूछा कि यदि प्रधानमंत्री की पोस्ट भी तकनीकी त्रुटि का शिकार हो सकती है, तो प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री को नियंत्रित करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। इसके अलावा, पोस्ट हटाने की जिम्मेदारी, निर्णय लेने की प्रक्रिया और कंपनी की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर भी चर्चा हुई।
डीपफेक और एल्गोरिदम पर भी हुई चर्चा
बैठक में प्रधानमंत्री से जुड़े डीपफेक वीडियो, एल्गोरिदम की निष्पक्षता (Algorithmic Bias) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस बैठक में Meta के अलावा Google, X (पूर्व ट्विटर), YouTube और Snapchat के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हुईं तेज
जहां एक ओर महुआ मोइत्रा ने Meta का समर्थन किया, वहीं कुछ सांसदों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन नीति पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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