Last updated: August 5th, 2026 at 09:19 am
मुंबई: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को कथित डीपफेक वीडियो मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गडकरी से जुड़े आपत्तिजनक, संपादित और कथित मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाने का निर्देश देते हुए प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सख्त आदेश जारी किए हैं।
हाई कोर्ट की एकल पीठ ने Meta, X Corp और Google LLC को निर्देश दिया कि वे ऐसे सभी पोस्ट और वीडियो बिना देरी के अपने प्लेटफॉर्म से हटाएं। अदालत ने कहा कि अश्लील, भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री का सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर बने रहना स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट ने प्लेटफॉर्म्स से पूछा बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सोशल मीडिया कंपनियों से पूछा कि क्या उनके पास ऐसी तकनीक मौजूद है, जिससे अदालत के हस्तक्षेप के बिना भी इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री की पहचान कर उसे तुरंत हटाया जा सके। अदालत ने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं रह सकती।
डीपफेक वीडियो को लेकर उठाया गया मामला
यह विवाद AI तकनीक से तैयार किए गए कथित डीपफेक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें नितिन गडकरी और उनके परिवार को E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल नीति से कथित आर्थिक लाभ मिलने का दावा किया गया था। याचिका में कहा गया कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।
गडकरी की ओर से अदालत को बताया गया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है और इसका उनके मंत्रालय से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
नितिन गडकरी ने अदालत से आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री को तत्काल हटाने के साथ-साथ अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं, बल्कि फर्जी और मानहानिकारक डिजिटल कंटेंट के खिलाफ जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से की गई है।
डीपफेक पर बढ़ी कानूनी सख्ती
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में डीपफेक और AI आधारित फर्जी कंटेंट को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। हाई कोर्ट की यह टिप्पणी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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