Last updated: August 6th, 2026 at 08:37 am

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने देश में उभर रही Gen Z (युवा पीढ़ी) की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि युवाओं के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का प्रभाव तत्काल नहीं, बल्कि आने वाले समय में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा कि सोशल मीडिया ने युवाओं को अपनी बात रखने का नया मंच दिया है, लेकिन किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव की असली ताकत हमेशा उन मुद्दों में होती है, जो सीधे जनता से जुड़ते हैं।
‘अभी आंदोलन का मुख्य दौर बाकी है’
प्रशांत किशोर के मुताबिक, वर्तमान समय में युवाओं के नेतृत्व में जो राजनीतिक सक्रियता दिखाई दे रही है, उसका मुख्य प्रभाव अभी सामने आना बाकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले एक से दो वर्षों में इस तरह के आंदोलनों का असर भारतीय राजनीति में अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
अन्ना आंदोलन का दिया उदाहरण
उन्होंने अपने तर्क को मजबूत करते हुए अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि उस आंदोलन के शुरुआती चरण और उसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव के बीच काफी समय का अंतर रहा था। इसी तरह वर्तमान युवा आंदोलन का असर भी धीरे-धीरे सामने आएगा।
सरकार के लिए अहम संकेत
प्रशांत किशोर ने कहा कि हाल के छात्र और युवा आंदोलनों ने यह संदेश दिया है कि संगठित जनसमर्थन के जरिए सरकारों पर दबाव बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, यह किसी भी सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत माना जा सकता है।
सोशल मीडिया बना नई पीढ़ी का माध्यम
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी संवाद और संगठन के लिए Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर रही है। पहले यह भूमिका टेलीविजन और बाद में WhatsApp जैसे माध्यम निभाते थे, जबकि अब नई पीढ़ी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बात व्यापक स्तर तक पहुंचा रही है।
आने वाले समय पर रहेंगी नजरें
प्रशांत किशोर का मानना है कि मौजूदा युवा आंदोलन किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में यह किन मुद्दों पर आगे बढ़ेगा और इसका स्वरूप क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसकी राजनीतिक दिशा पर सभी दलों की नजर बनी रहेगी।
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