Human Live Media

HomeNewsउत्तर प्रदेश के कॉलेजों में शुरू होगा व्यापक एंटी-ड्रग अभियान, कैंपस के 500 मीटर दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती

उत्तर प्रदेश के कॉलेजों में शुरू होगा व्यापक एंटी-ड्रग अभियान, कैंपस के 500 मीटर दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू करने का फैसला किया
images – 2026-08-08T203215.843

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू करने का फैसला किया है। सरकार की योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ कैंपस के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और सप्लाई पर भी सख्ती की जाएगी। यह अभियान राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किया जाना है।

Table of Contents

     

    सरकार के इस अभियान का उद्देश्य कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों को नशामुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। अभियान के तहत छात्रों के बीच नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाने, काउंसलिंग उपलब्ध कराने और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।

     

    सरकार की ओर से लिए गए प्रमुख फैसलों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ की बिक्री पर सख्ती शामिल है। प्रशासन और संबंधित विभाग इस क्षेत्र में दुकानों और अन्य गतिविधियों की निगरानी करेंगे। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।

     

    अभियान के तहत शिक्षण संस्थानों के प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ाने की भी योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, कैंपस में आने वाले पार्सल की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने जैसे उपाय किए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि कॉलेज परिसरों में नशीले पदार्थों की उपलब्धता रोकने के लिए केवल छात्रों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सप्लाई नेटवर्क पर भी कार्रवाई आवश्यक है।

     

    उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ते हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय इसे छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी वाला जनअभियान बनाया जाना चाहिए।

     

    अभियान में छात्रों की पहचान और काउंसलिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा। जिन विद्यार्थियों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका होगी, उन्हें सीधे अपराधी मानने के बजाय आवश्यकता के अनुसार काउंसलिंग और सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को नशे की आदत से बाहर निकालना और उनकी पढ़ाई तथा भविष्य को प्रभावित होने से बचाना है।

     

    शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान छात्रों को नशीले पदार्थों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी। शिक्षकों और संस्थान प्रशासन को भी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने तथा संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

     

    सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब राज्य में उच्च शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। एक दिन पहले राज्यपाल ने भी विश्वविद्यालयों में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अभियान को लेकर तैयारियां तेज कीं।

     

    शुक्रवार को राज्य विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रकों के साथ हुई बैठक में भी इस अभियान को लेकर चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य नशामुक्त वातावरण तैयार करने के साथ प्रधानमंत्री के ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान को राज्य स्तर पर मजबूत करना बताया गया है।

     

    विशेषज्ञों के अनुसार, कॉलेज स्तर पर नशे की समस्या से निपटने के लिए तीन स्तरों पर काम जरूरी है—पहला, नशीले पदार्थों की सप्लाई पर नियंत्रण; दूसरा, छात्रों में जागरूकता; और तीसरा, नशे की चपेट में आ चुके विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग और पुनर्वास। केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

     

    छात्रों के लिए काउंसलिंग व्यवस्था इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। कई बार विद्यार्थी साथियों के दबाव, तनाव या अन्य व्यक्तिगत कारणों से नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं। समय रहते उनकी पहचान और सहायता से समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

     

    कॉलेज प्रशासन को भी अभियान की नियमित निगरानी करनी होगी। कैंपस के आसपास संदिग्ध दुकानों, गतिविधियों और बाहरी लोगों की आवाजाही पर नजर रखने के साथ-साथ छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता होगी।

     

    सरकार की नई पहल का असर आने वाले समय में राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दिखाई दे सकता है। यदि 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई, नियमित निगरानी और छात्रों की काउंसलिंग एक साथ लागू होती है तो शिक्षण संस्थानों में नशे की उपलब्धता को कम करने में मदद मिल सकती है।

     

    उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग अभियान को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, निरीक्षण और काउंसलिंग गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य छात्रों के लिए सुरक्षित और नशामुक्त शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।

    Loading

    Comments are off for this post.