Last updated: August 12th, 2026 at 05:22 am

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर टैरिफ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिका में प्रस्तावित रूस प्रतिबंध विधेयक के तहत भारत जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले का समाधान निकाल सकते हैं।
न्यूज एजेंसी ANI के सवाल पर पीटर नवारो ने कहा कि ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझा सकते हैं। उन्होंने इस मामले में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया।
रूस से तेल खरीद बना टैरिफ विवाद की वजह
अमेरिका में प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत और चीन भी संभावित रूप से प्रभावित देशों में शामिल हैं।
नवारो ने भारत की रूस से तेल खरीद का जिक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद काफी बढ़ाई। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि रूस से ऊर्जा कारोबार उसके युद्ध संबंधी संसाधनों को मजबूत करने में मदद करता है।
सीनेट से पारित हो चुका है विधेयक
रूस प्रतिबंध विधेयक को अमेरिकी सीनेट में दोनों दलों के सांसदों का समर्थन मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीनेट में यह प्रस्ताव 11 के मुकाबले 86 वोटों से पारित हुआ। हालांकि इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया से भी गुजरना होगा।
अगर प्रस्तावित कानून आगे बढ़ता है तो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। टैरिफ की वास्तविक दर और उसके लागू होने की शर्तें आगे की विधायी प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेंगी।
पुतिन और रूसी कंपनियां भी निशाने पर
प्रस्तावित प्रतिबंधों का दायरा सिर्फ रूस से तेल खरीदने वाले देशों तक सीमित नहीं रहने की बात कही जा रही है। रूसी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और रूस के रक्षा क्षेत्र को समर्थन देने वाली विदेशी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए जाने का प्रावधान प्रस्ताव में बताया गया है।
रूस के शीर्ष अधिकारियों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हो सकते हैं। वहीं, भारत जैसे देशों पर लागू होने वाले संभावित टैरिफ का अंतिम स्तर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर तय कर सकते हैं।
अब मोदी-ट्रंप बातचीत पर नजर
पीटर नवारो के बयान के बाद इस विवाद को लेकर भारत-अमेरिका कूटनीतिक बातचीत पर नजर बढ़ गई है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से रूस के साथ भारत के ऊर्जा कारोबार पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने की बात करता रहा है।
फिलहाल प्रस्तावित कानून को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलना बाकी है। ऐसे में भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का खतरा अभी संभावित कदम के तौर पर देखा जा रहा है, न कि लागू हो चुका शुल्क।
![]()
Comments are off for this post.