Last updated: August 12th, 2026 at 12:37 pm

दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) ने कथित चावल वितरण घोटाले को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। AAP विधायक चावल के बोरे लेकर विधानसभा परिसर में पहुंचे और सरकार से मामले की जांच की मांग की। हंगामे के दौरान आठ AAP विधायकों को सदन से बाहर कर दिया गया।
AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले चावल के वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी ने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान AAP विधायक अपने साथ चावल लेकर विधानसभा पहुंचे। उनका कहना था कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के तहत मिलने वाला चावल लोगों तक सही तरीके से पहुंच रहा है या नहीं।
विधानसभा के अंदर इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। AAP विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मामले पर चर्चा की मांग की।
हंगामा बढ़ने के बाद विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आठ AAP विधायकों को सदन से बाहर कर दिया गया।
AAP ने कार्रवाई को लेकर सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे चावल वितरण से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक स्टंट बताया और कहा कि विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय AAP को नियमों के तहत मुद्दे उठाने चाहिए।
चावल वितरण को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सीधे जरूरतमंद परिवारों को प्रभावित कर सकती है।
AAP विधायकों का प्रदर्शन विधानसभा के बाहर भी चर्चा का विषय बना। चावल के बोरे लेकर प्रदर्शन करने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए, जिससे मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आ गया।
विपक्ष ने मांग की कि सरकार पूरे वितरण नेटवर्क की जांच करे और यह पता लगाए कि सरकारी चावल की खरीद, भंडारण और वितरण में कहीं कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं।
सरकार की ओर से फिलहाल विपक्ष के आरोपों को लेकर अलग रुख अपनाया गया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि किसी भी आरोप की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए और विधानसभा में हंगामा करके इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
इस घटना ने दिल्ली विधानसभा में सत्ता पक्ष और AAP के बीच बढ़ते टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया है। मानसून सत्र के दौरान पहले भी कई मुद्दों पर दोनों पक्ष आमने-सामने रहे हैं।
आठ विधायकों को सदन से बाहर किए जाने के बाद AAP ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सरकार पर हमला किया। पार्टी के अनुसार विपक्ष को जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चावल वितरण को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच होती है या नहीं और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय की जाती है।
फिलहाल: AAP के प्रदर्शन, चावल के बोरे लेकर विधानसभा पहुंचने और आठ विधायकों के निष्कासन ने दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दौर को खासा हंगामेदार बना दिया है।
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