
बिहार में NEET-UG 2026 से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान दो MBBS छात्रों की गिरफ्तारी से solver racket का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने दोनों को कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है, जो उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने की व्यवस्था करता था।
जांच एजेंसी के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी MBBS के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। आरोप है कि वे NEET-UG और Re-NEET से संबंधित एक कथित solver network का हिस्सा थे। इस मामले में जांचकर्ताओं ने परीक्षा में उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने और पहचान संबंधी प्रक्रिया में हेरफेर किए जाने की आशंका जताई है।
NEET देश की सबसे बड़ी medical entrance examinations में से एक है। हर साल लाखों विद्यार्थी MBBS, BDS और अन्य medical courses में प्रवेश के लिए परीक्षा देते हैं। ऐसे में किसी organized solver racket का सामने आना परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों के लिए ₹12 लाख से ₹30 लाख तक की रकम में solver उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि इस रकम और नेटवर्क से जुड़े सभी दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
Solver racket में आमतौर पर किसी उम्मीदवार की जगह कोई दूसरा व्यक्ति परीक्षा में बैठता है। यदि identity verification या biometric प्रक्रिया को कथित रूप से bypass किया जाए तो असली उम्मीदवार की जगह दूसरे व्यक्ति के परीक्षा देने की संभावना पैदा होती है।
EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित network में कितने लोग शामिल हैं और इसका संचालन कौन कर रहा था। गिरफ्तार किए गए दोनों MBBS छात्रों से पूछताछ के जरिए दूसरे आरोपियों और संभावित beneficiaries तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
जांच में biometric manipulation और forged documents से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। यदि ये आरोप जांच में साबित होते हैं तो मामला केवल cheating तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि document forgery और organized examination fraud से जुड़े गंभीर अपराध भी सामने आ सकते हैं।
पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर सकती हैं कि आरोपियों ने किन candidates से संपर्क किया था और उनके बीच financial transactions किस माध्यम से हुए।
Digital evidence इस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। Mobile phones, WhatsApp या अन्य messaging applications, bank transactions और call records के जरिए कथित network की पूरी chain का पता लगाया जा सकता है।
NEET जैसी परीक्षा में identity verification के कई स्तर होते हैं। परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की photograph, biometric information और अन्य identification details की जांच की जाती है। यदि इन प्रक्रियाओं में किसी स्तर पर हेरफेर की गई हो तो उससे examination security पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में एक-एक अंक का महत्व होता है। लाखों विद्यार्थी सीमित medical seats के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में यदि कोई candidate गलत तरीके से दूसरे व्यक्ति की मदद लेकर परीक्षा देता है तो इससे ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है।
इसी वजह से examination fraud के मामलों में जांच एजेंसियां network के सभी स्तरों की पहचान करने की कोशिश करती हैं। केवल solver को पकड़ना पर्याप्त नहीं होता; candidate, intermediary और financial network की भी जांच की जाती है।
बिहार में EOU पहले भी competitive examinations से जुड़े मामलों की जांच करती रही है। NEET से जुड़े इस मामले में भी जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है और नए नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गिरफ्तार दोनों छात्रों की medical background भी जांच में महत्वपूर्ण है। यदि किसी medical student ने solver के रूप में काम किया है तो उसके पास examination pattern और medical entrance preparation से जुड़ी पर्याप्त जानकारी होने की संभावना हो सकती है।
हालांकि अभी यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी या पुलिस का आरोप किसी व्यक्ति को अदालत में दोषी साबित नहीं करता। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
जांच एजेंसी अब कथित racket के financial और communication links की पड़ताल कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि network बिहार तक सीमित था या इसके तार दूसरे राज्यों तक भी जुड़े हुए थे।
यदि जांच में बड़े network की पुष्टि होती है तो अन्य राज्यों में मौजूद intermediaries और candidates के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
NEET candidates के लिए यह मामला एक बार फिर examination security और fair competition के महत्व को सामने लाता है। परीक्षा में किसी भी तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए technology-based verification और strict monitoring महत्वपूर्ण है।
बिहार EOU ने NEET-UG 2026 से जुड़े कथित solver racket में दो MBBS छात्रों को गिरफ्तार किया है। जांच में उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने, biometric manipulation और forged documents से जुड़े आरोप सामने आए हैं। कथित तौर पर solver उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये की डील की जाती थी। अब जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
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