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एक्सप्रेसवे हादसों पर यूपी में नया कमांड सेंटर, लखनऊ से होगी निगरानी और राहत कार्यों में तेजी

उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे पर होने वाले सड़क हादसों से निपटने और दुर्घटनाओं के बाद राहत एवं बचाव कार्य को
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उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे पर होने वाले सड़क हादसों से निपटने और दुर्घटनाओं के बाद राहत एवं बचाव कार्य को तेज करने के लिए एक नई केंद्रीकृत व्यवस्था तैयार की जा रही है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPEIDA की ओर से लखनऊ में एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल हब विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे पर होने वाली दुर्घटनाओं की निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर पुलिस, एंबुलेंस, पेट्रोलिंग टीम तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को तेजी से सक्रिय करना है।

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    प्रदेश में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों पर हर दिन बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। तेज रफ्तार और लंबी दूरी के कारण इन मार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में कई बार राहत टीमों के पहुंचने में महत्वपूर्ण समय लग जाता है। नई व्यवस्था का लक्ष्य इसी प्रतिक्रिया समय को कम करना है।

    प्रस्तावित कमांड सेंटर में एक्सप्रेसवे से जुड़े अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं को एक जगह पर एकत्र किया जाएगा। दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना देने और घटनास्थल के लिए आवश्यक संसाधन भेजने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    नई प्रणाली में तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक्सप्रेसवे पर लगे कैमरों और अन्य निगरानी प्रणालियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर दुर्घटनाओं और यातायात की स्थिति पर नजर रखने की योजना है। इससे किसी घटना के बाद केवल फोन कॉल या स्थानीय सूचना पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।

    दुर्घटना होने की स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को जितनी जल्दी चिकित्सा सहायता मिले, उसके बचने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। इसलिए कमांड सेंटर का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य गोल्डन ऑवर के दौरान राहत और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में देरी को कम करना होगा।

    कमांड सेंटर से एक्सप्रेसवे पर तैनात पेट्रोलिंग वाहनों और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। यदि किसी स्थान पर दुर्घटना की सूचना मिलती है तो नजदीकी टीम को घटनास्थल पर भेजने के साथ एंबुलेंस और पुलिस को भी अलर्ट किया जा सकेगा।

    इसके अलावा दुर्घटना के कारण सड़क पर यातायात बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था करने में भी यह प्रणाली मदद कर सकती है। यदि किसी लेन में वाहन दुर्घटना के कारण फंस जाते हैं तो संबंधित टीमों को सूचना देकर यातायात को नियंत्रित करने और सड़क को जल्द से जल्द खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है।

    एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी समस्याओं पर निगरानी भी इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकती है। उपलब्ध तकनीकी प्रणालियों के जरिए जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करके वहां अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का विस्तार राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। इन मार्गों से शहरों के बीच यात्रा का समय कम हुआ है और औद्योगिक तथा व्यावसायिक गतिविधियों को भी फायदा मिला है। लेकिन तेज गति वाले इन मार्गों पर सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    दुर्घटनाओं के अलावा वाहन खराब होने, सड़क पर किसी वस्तु के गिरने, आग लगने या अन्य आपात स्थिति में भी केंद्रीकृत निगरानी व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। किसी भी घटना की जानकारी मिलने पर संबंधित टीम को तत्काल भेजा जा सकता है।

    नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण फायदा यह भी हो सकता है कि दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों को एक जगह एकत्र किया जा सके। बार-बार दुर्घटना होने वाले स्थानों की पहचान करके वहां अतिरिक्त संकेतक, स्पीड कंट्रोल उपाय, रोशनी या अन्य सड़क सुरक्षा सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

    कमांड सेंटर की सफलता केवल तकनीकी उपकरणों पर निर्भर नहीं करेगी। कैमरों और संचार व्यवस्था के साथ-साथ पर्याप्त संख्या में पेट्रोलिंग वाहन, प्रशिक्षित कर्मचारी, एंबुलेंस और पुलिस बल की उपलब्धता भी जरूरी होगी। अलग-अलग विभागों के बीच तेज समन्वय के बिना केवल निगरानी प्रणाली से अपेक्षित परिणाम हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

    प्रस्तावित कमांड एंड कंट्रोल हब के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया व्यवस्था को अधिक आधुनिक और केंद्रीकृत बनाने की कोशिश कर रही है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो दुर्घटना की सूचना से लेकर राहत और चिकित्सा सहायता पहुंचने तक का समय कम किया जा सकता है।

    उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के लगातार विस्तार को देखते हुए सड़क सुरक्षा के लिए ऐसी तकनीकी व्यवस्था आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। अब मुख्य चुनौती इस परियोजना को तेजी से लागू करने और इसे एक्सप्रेसवे पर मौजूद सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं के साथ प्रभावी रूप से जोड़ने की होगी।

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