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बांकीपुर के बाद प्रशांत किशोर का बिहार मिशन तेज, 38 जिलों में यात्रा की तैयारी; संगठन विस्तार पर फोकस

पटना: बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज ने बिहार में अपना संगठन मजबूत करने की तैयारी तेज कर
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पटना: बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज ने बिहार में अपना संगठन मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी के पहले विधायक बने प्रशांत किशोर अब राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत वे सितंबर से बिहार के सभी 38 जिलों का दौरा कर सकते हैं।

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    यात्रा के दौरान लोगों से सीधा संवाद, स्थानीय समस्याओं की जानकारी, सदस्यता अभियान और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर जोर रहने की संभावना है।

    पश्चिमी चंपारण से शुरू हो सकती है यात्रा

    प्रशांत किशोर की प्रस्तावित बिहार यात्रा की शुरुआत पश्चिमी चंपारण से होने की चर्चा है। यहां के भितिहरवा गांधी आश्रम से ही उन्होंने 2 अक्टूबर 2022 को जन सुराज पदयात्रा शुरू की थी। इस बार भी पश्चिमी चंपारण से शुरुआत उनके अभियान को एक खास राजनीतिक संदेश दे सकती है।

    यात्रा को चरणों में आयोजित किए जाने की तैयारी है। एक चरण में तीन से चार जिलों को शामिल किया जा सकता है। सभी जिलों का दौरा पूरा होने के बाद पटना में इसके समापन की संभावना है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम पर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मुहर लगना बाकी है।

    बांकीपुर की जीत से बढ़ा पार्टी का उत्साह

    बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत ने जन सुराज के राजनीतिक अभियान को नई गति दी है। पार्टी के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को 19,324 मतों के अंतर से हराकर विधानसभा में जन सुराज की पहली मौजूदगी दर्ज कराई।

    इस सफलता के बाद पार्टी अब इसे केवल एक विधानसभा सीट की जीत के रूप में नहीं देख रही है। संगठन की कोशिश इस परिणाम को राज्य के दूसरे हिस्सों तक राजनीतिक विस्तार के आधार के तौर पर इस्तेमाल करने की है।

    MLC और पंचायत चुनाव पर भी नजर

    प्रस्तावित यात्रा का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवंबर 2026 में बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की आठ सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके बाद 2027 में परिसीमन के बाद पंचायत चुनाव होने हैं।

    ऐसे में जन सुराज विधानसभा के साथ-साथ पंचायत और बूथ स्तर पर भी अपना संगठन मजबूत करना चाहता है। यात्रा के दौरान स्थानीय नेताओं और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

    लोगों से संवाद पर रहेगा जोर

    जन सुराज की रणनीति शुरुआत से ही लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझने पर आधारित रही है। पार्टी की प्रवक्ता सोनाली आनंद के मुताबिक, यात्रा को केवल चुनावी अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    बांकीपुर में चल रही आभार यात्रा के दौरान भी प्रशांत किशोर स्थानीय लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। नई बिहार यात्रा में भी इसी तरह के सीधे संवाद को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।

    2025 की हार के बाद संगठन के सामने बड़ी चुनौती

    2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज को अपेक्षित चुनावी सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद संगठन को लेकर कई सवाल उठे और कुछ नेताओं ने पार्टी से दूरी भी बनाई। हालांकि बांकीपुर की जीत ने पार्टी को दोबारा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब प्रशांत किशोर के सामने विधानसभा में अपनी भूमिका मजबूत करने के साथ-साथ राज्यभर में संगठन का विस्तार करने की चुनौती है।

    सरकार के खिलाफ भी बन सकता है राजनीतिक मंच

    प्रस्तावित यात्रा के दौरान जन सुराज स्थानीय मुद्दों के साथ राज्य सरकार की नीतियों और कामकाज को भी निशाने पर ले सकता है। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, सड़क, प्रशासन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को अभियान में प्रमुखता मिलने की संभावना है। यानी यह यात्रा केवल संगठन विस्तार तक सीमित रहती है या सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक अभियान का रूप लेती है, इसकी तस्वीर आगे साफ होगी।

    सदस्यता अभियान को भी मिलेगी रफ्तार

    जन सुराज की योजना पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने की है। प्रशांत किशोर की मौजूदगी वाली यात्रा के जरिए पार्टी को नए सदस्यों और समर्थकों को जोड़ने की उम्मीद है। अगर यह अभियान सफल रहता है, तो आगामी विधान परिषद और पंचायत चुनावों में संगठन को इसका फायदा मिल सकता है।

    पहले भी कर चुके हैं 3,500 किलोमीटर की पदयात्रा

    प्रशांत किशोर के लिए बिहार में लंबी यात्रा कोई नई रणनीति नहीं है। 2022 में शुरू हुई जन सुराज पदयात्रा के दौरान उन्होंने राज्य के सभी 38 जिलों में करीब 3,500 किलोमीटर का सफर किया था। इस दौरान गांवों और कस्बों में लोगों से सीधे बातचीत की गई थी।

    अब बांकीपुर की जीत के बाद प्रशांत किशोर उसी जनसंपर्क मॉडल को नए राजनीतिक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि 38 जिलों की प्रस्तावित यात्रा जन सुराज के संगठन और राज्य की राजनीति पर कितना असर डालती है।

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