Last updated: August 25th, 2026 at 11:23 am

नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसोला इलाके में खुले नाले में गिरने के बाद लापता हुए 15 वर्षीय किशोर मिथुन का शव मंगलवार को करीब 72 घंटे से अधिक समय तक चले तलाशी अभियान के बाद बरामद कर लिया गया। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला मिथुन शनिवार सुबह पतंग पकड़ने की कोशिश के दौरान खुले नाले में गिर गया था। घटना के बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने बड़े स्तर पर तलाश अभियान चलाया था।
जानकारी के अनुसार, हादसा शनिवार सुबह करीब 11 बजे जसोला गांव में हुआ। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मिथुन पतंग के पीछे भागते हुए नाले के पास पहुंचा और अचानक उसमें गिर गया। परिवार ने कुछ देर बाद उसके लापता होने की जानकारी दी, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर उसकी तलाश शुरू की गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। बाद में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी NDRF के जवानों और गोताखोरों को भी तलाशी अभियान में लगाया गया। नाले में पानी का बहाव और जमा कचरा बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बना रहा।
मिथुन के परिवार के लिए सबसे मुश्किल समय तब आया जब कई घंटों की तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला। परिवार के लोग लगातार मौके पर मौजूद रहे और बचाव दल से बच्चे को खोजने की अपील करते रहे।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में मिथुन के पिता खुद नाले में उतरकर अपने बेटे को तलाशते दिखाई दिए। हाथ में डंडा लेकर वह पानी और गंदगी के बीच बेटे की तलाश करते रहे। इस दृश्य ने घटना की गंभीरता और परिवार की बेबसी को सामने ला दिया।
करीब तीन दिनों तक चले अभियान के बाद मंगलवार को मिथुन का शव बरामद किया गया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि नाले में जमा कचरे और गंदगी के कारण तलाश अभियान में मुश्किलें आईं। इन दावों की पुष्टि और नाले की स्थिति की जांच अब संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा सकती है।
हादसे के बाद नगर निगम की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठे हैं। घटना के संबंध में दिल्ली नगर निगम ने दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। अधिकारी के खिलाफ कथित ड्यूटी में लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर नाराजगी और दुख जताया था। उन्होंने मुख्य सचिव से नाले के अधिकार क्षेत्र की जानकारी मांगी और जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद संबंधित जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया गया।
इस घटना ने दिल्ली में खुले नालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर खुले नालों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा ढक्कन, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं होने पर बच्चों और राहगीरों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी नाले को सुरक्षित तरीके से ढकने और उसकी नियमित सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नाला सुरक्षित तरीके से ढका या संरक्षित होता तो इस तरह की दुर्घटना को रोका जा सकता था। हालांकि इस संबंध में जिम्मेदारी और लापरवाही का अंतिम निर्धारण आधिकारिक जांच के बाद ही होगा।
नाले के रखरखाव को लेकर अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी का मुद्दा भी सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित नाला पहले दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े क्षेत्र के रूप में देखा जाता था, जबकि बाद में उसके रखरखाव की जिम्मेदारी MCD को दी गई थी। अब यह भी जांच का विषय है कि दुर्घटना वाले स्थान पर रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी किस विभाग की थी।
मिथुन का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया गया है और दिल्ली में मजदूरी करता है। परिवार के लिए बच्चे की मौत आर्थिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर बेहद बड़ी त्रासदी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने परिवार को सहायता देने की मांग भी उठाई है।
इस हादसे ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि दिल्ली में मानसून के दौरान खुले नालों और जल निकासी वाले स्थानों की सुरक्षा की जांच कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही है। केवल हादसे के बाद अधिकारी को निलंबित करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। शहर में ऐसे सभी खुले और जोखिम वाले नालों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करना भी जरूरी है।
विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवासीय क्षेत्रों के पास खुले नालों पर मजबूत ढक्कन, रेलिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए। बारिश के मौसम में जलभराव वाले इलाकों में अतिरिक्त निगरानी भी आवश्यक है।
मिथुन की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना और दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
जसोला में 15 वर्षीय मिथुन की मौत ने दिल्ली के खुले नालों और मानसून के दौरान नागरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 72 घंटे से अधिक चले तलाशी अभियान के बाद उसका शव बरामद हुआ, जबकि MCD ने कथित लापरवाही के मामले में एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। अब जांच में यह तय किया जाएगा कि हादसे के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और ऐसे खतरनाक खुले नालों को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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