Last updated: August 25th, 2026 at 11:24 am

नई दिल्ली: IIT दिल्ली में MSc Physics के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए प्रशासन से मामले की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदारी तय करने और मृत छात्र के परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग की है। छात्रों ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
ऋषिकेश कुमार की मौत 22 अगस्त को IIT दिल्ली के Lecture Hall Complex की छठी मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। पुलिस के अनुसार, उन्हें सुबह करीब 8:33 बजे घटना की सूचना मिली थी। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और बताया कि कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मामले की जांच के दौरान छात्र के फोन, काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारी की भी जांच की जा रही है।
घटना के बाद सोमवार को IIT दिल्ली परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए। छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और Lecture Hall Complex के बाहर प्रदर्शन किया। बाद में बारिश के कारण प्रदर्शनकारी परिसर के अंदर चले गए, लेकिन उनका धरना जारी रहा। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक छात्र की मौत का मामला नहीं है, बल्कि संस्थान में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यापक व्यवस्था की भी समीक्षा होनी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन पर कथित लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ऋषिकेश को आवास और अकादमिक अवसरों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा था और इन परिस्थितियों का उनकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी जारी है और किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में स्वतंत्र जांच के अलावा Student Affairs Office से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और Physics Department के प्रमुख की जवाबदेही शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
छात्रों ने यह भी मांग की है कि प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए। उनका कहना है कि छात्र समुदाय को अपनी चिंताओं और मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
मामले के बढ़ते दबाव के बीच IIT दिल्ली ने एक External Inquiry Committee गठित करने की घोषणा की है। संस्थान के अनुसार समिति घटना की परिस्थितियों की जांच करेगी, संबंधित छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक कार्यालयों से बातचीत करेगी तथा संस्थान की प्रक्रियाओं की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देगी। समिति को अपनी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर देने का लक्ष्य दिया गया है।
जांच समिति में IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार, AIIMS के मनोचिकित्सा विभाग से जुड़े विशेषज्ञ, दो छात्र प्रतिनिधि और संस्थान के रजिस्ट्रार शामिल हैं। इसका उद्देश्य घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा करना बताया गया है।
IIT दिल्ली ने मृत छात्र के परिवार की सहायता के लिए भी कुछ कदमों की घोषणा की है। संस्थान ने चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति, Benevolent Fund से सहायता और परिवार के लिए स्वैच्छिक योगदान फंड बनाने की बात कही है। इसके अलावा छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक बाहरी Ombudsperson नियुक्त करने और मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त faculty-student mentor व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बताई गई है।
छात्रों का कहना है कि केवल जांच समिति बनाना पर्याप्त नहीं है। वे प्रशासनिक जवाबदेही और मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था में ठोस बदलाव चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने संस्थान में पहले हुई ऐसी घटनाओं को देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मौजूदा प्रोटोकॉल को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है।
यह घटना IIT दिल्ली में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को भी सामने ला रही है। हाल के वर्षों में देश के विभिन्न IIT परिसरों में छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आते रहे हैं, जिसके कारण उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत निवारण व्यवस्था पर लगातार चर्चा होती रही है।
ऋषिकेश कुमार के बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार उन्होंने IIT दिल्ली में MSc Physics कार्यक्रम में दाखिला लिया था। वह मूल रूप से पटना, बिहार से थे। IIT में दाखिले से पहले उन्होंने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और IIT JAM की तैयारी के दौरान ट्यूशन पढ़ाकर भी आय अर्जित की थी।
पुलिस की जांच अभी जारी है और घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। किसी भी प्रशासनिक निर्णय या व्यक्ति की जिम्मेदारी के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
IIT दिल्ली में ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग में बदल गया है। संस्थान ने बाहरी जांच समिति गठित कर दी है, जबकि छात्र ₹1 करोड़ मुआवजे और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही समेत कई मांगों पर कायम हैं।
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