Human Live Media

HomeNewsSC-ST आरक्षण में ‘कोटे के भीतर कोटा’ पर सियासी घमासान, संतोष सुमन के बयान से NDA में बढ़ी हलचल

SC-ST आरक्षण में ‘कोटे के भीतर कोटा’ पर सियासी घमासान, संतोष सुमन के बयान से NDA में बढ़ी हलचल

पटना: बिहार में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के भीतर वर्गीकरण और ‘कोटे में कोटा’ को लेकर राजनीतिक बहस
images – 2026-08-29T144200.317

पटना: बिहार में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के भीतर वर्गीकरण और ‘कोटे में कोटा’ को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने आरक्षण के मौजूदा ढांचे में बदलाव की मांग का समर्थन किया है। बिहार सरकार में मंत्री और हम के प्रमुख संतोष सुमन ने कहा कि आरक्षण का लाभ उन समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए, जो अब तक अपेक्षित रूप से इसका लाभ नहीं उठा सके हैं।

Table of Contents

    संतोष सुमन ने उठाया सबसे वंचित समुदायों का मुद्दा

    संतोष सुमन का कहना है कि एससी-एसटी वर्ग के भीतर भी कई समुदाय सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से काफी पीछे हैं। उन्होंने मुसहर, भुइयां, डोम, हलखोर और नट जैसे समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी वास्तविक स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आरक्षण खत्म करने की मांग नहीं कर रही है। मुद्दा यह है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन तबकों तक किस तरह पहुंचाया जाए, जो लंबे समय से सबसे पीछे हैं।

    ‘क्रीमी लेयर’ से अलग है कोटे में कोटा का मुद्दा

    संतोष सुमन ने यह भी साफ किया कि उनकी मांग को क्रीमी लेयर की बहस से जोड़ना सही नहीं है। उनके मुताबिक, हम एससी-एसटी आरक्षण के भीतर वर्गीकरण और कोटे के अंदर कोटा दिए जाने की बात कर रहे हैं।

    उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरक्षित वर्ग के भीतर भी कुछ समुदाय लगातार पिछड़े रह जाते हैं, तो उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए व्यवस्था में बदलाव पर विचार क्यों नहीं किया जाना चाहिए।

    जेडीयू ने जताया विरोध

    आरक्षण में किसी भी तरह के बदलाव को लेकर जेडीयू की ओर से विरोध सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था में छेड़छाड़ या समीक्षा की कोशिश का व्यापक विरोध किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए इसे बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया।

    आरक्षण खत्म करने की मांग नहीं: संतोष सुमन

    संतोष सुमन ने दोहराया कि उनकी पार्टी आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। उनका तर्क है कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य केवल आरक्षण को बनाए रखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उसका वास्तविक लाभ समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुंचे।

    उनके मुताबिक, ‘कोटे में कोटा’ की बहस का केंद्र यही होना चाहिए कि जो समुदाय अभी भी पीछे हैं, उन्हें उनका उचित प्रतिनिधित्व और अवसर कैसे मिले।

    बिहार की राजनीति में बढ़ सकती है बहस

    आरक्षण में वर्गीकरण का मुद्दा बिहार में राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। हम की मांग और जेडीयू के विरोध के बाद एनडीए के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद की चर्चा तेज हो सकती है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

    Loading

    Comments are off for this post.