Last updated: August 29th, 2026 at 11:06 am

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। जांच के दौरान पुलिस को ऑनलाइन धोखाधड़ी, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। मामले में पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, साइबर अपराधियों ने लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपने जाल में फंसाकर उनके बैंक खातों से पैसे निकालने की कोशिश की। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले कई लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की गतिविधियों पर निगरानी के बाद कार्रवाई की गई। जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी जुटाई गई। इसके आधार पर पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचने की कोशिश की।
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी पहचान, मोबाइल नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ मामलों में पीड़ितों को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, सरकारी अधिकारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर फोन किया जाता है। इसके बाद उनसे OTP, बैंकिंग जानकारी या पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है।
झांसी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और उनके जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ। इसके लिए बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच कर सकती हैं। इनमें मौजूद कॉल रिकॉर्ड, चैट, बैंकिंग जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्य से नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क केवल झांसी तक सीमित नहीं हो सकता। डिजिटल लेनदेन से जुड़े मामलों में अलग-अलग राज्यों में मौजूद बैंक खातों और आरोपियों के संपर्क सामने आ सकते हैं। इसलिए पुलिस दूसरे राज्यों की एजेंसियों के साथ भी जानकारी साझा कर सकती है।
साइबर अपराधों में तेजी से बदलाव के कारण पुलिस के सामने भी नई चुनौतियां हैं। अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं। फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर धमकी और निवेश के झूठे वादे जैसे तरीके हाल के वर्षों में सामने आए हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन पर दबाव बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहता है तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करनी चाहिए।
किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान एप्लीकेशन डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधी कई बार ऐसे लिंक भेजते हैं जिनके जरिए मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी होने पर पीड़ित को तुरंत शिकायत करनी चाहिए। पैसे के डिजिटल ट्रांसफर के मामलों में जल्द शिकायत करने से रकम को रोकने या वापस हासिल करने की संभावना बढ़ सकती है।
झांसी में सामने आए इस मामले में पुलिस अब नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि आरोपियों को बैंक खातों की जानकारी कहां से मिलती थी और ठगी से प्राप्त रकम को आगे किस तरह भेजा जाता था।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि क्या गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले से किसी अन्य राज्य या जिले में साइबर अपराध का मामला दर्ज है। यदि पुराने मामलों से उनका संबंध सामने आता है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
साइबर अपराध के मामलों में बैंकिंग रिकॉर्ड महत्वपूर्ण सबूत साबित होते हैं। पुलिस संदिग्ध खातों में आने-जाने वाली रकम, ट्रांजैक्शन का समय और उससे जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच कर सकती है।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी कर सकती है। साथ ही ठगी से जुड़ी रकम और इस्तेमाल किए गए उपकरणों की बरामदगी की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकती है।
डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों को रोकना पुलिस और आम नागरिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। विशेषज्ञ लगातार लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की सलाह देते हैं।
झांसी में साइबर ठगी के कथित नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल फोन और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की कुल रकम का पता लगाने में जुटी है।
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