Last updated: August 29th, 2026 at 11:27 am

पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पटना में शनिवार को प्रदर्शन तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की न्यायिक जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से अपनी आवाज उठाते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। जब कुछ लोग बैरिकेड पार करने की कोशिश करने लगे तो मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा BPSC की 70वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल हो सके।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि हजारों अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
BPSC बिहार में सरकारी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है। ऐसे में परीक्षा से संबंधित किसी भी विवाद का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेने और मामले में स्पष्ट कार्रवाई की मांग की है।
शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों की कोशिश रही कि प्रदर्शन को नियंत्रित रखते हुए किसी तरह की बड़ी कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।
प्रदर्शनकारियों की एक अन्य मांग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों में ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराने की भी रही। प्रदर्शनकारियों ने इसे प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में जरूरी कदम बताया।
परीक्षा संबंधी विवाद को लेकर बिहार में छात्रों और अभ्यर्थियों के विरोध का यह मुद्दा पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बना हुआ है। विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों के विरोध और पुलिस कार्रवाई को लेकर बिहार सरकार की आलोचना की है।
सरकार की ओर से परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े आरोपों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रदर्शनकारी न्यायिक जांच की मांग पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि किसी स्वतंत्र जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों में पहले से ही पारदर्शिता और समय पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर चिंता रहती है। परीक्षा में देरी, परिणाम में विलंब या कथित गड़बड़ी जैसी परिस्थितियां उम्मीदवारों की तैयारी और करियर पर असर डाल सकती हैं।
पटना में हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे को सामने ला दिया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई स्थानीय प्रशासन और पुलिस के निर्णय पर निर्भर करेगी। वहीं प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर भी नजर बनी हुई है।
मामले का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि BPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं। परीक्षा की निष्पक्षता पर किसी भी तरह का विवाद पूरे भर्ती तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
पटना में प्रदर्शन के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग परीक्षा में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच कराने की है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और जांच से जुड़े फैसले इस विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।
पटना में BPSC की 70वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शनिवार को प्रदर्शन हुआ। गांधी मैदान से निकले प्रदर्शनकारियों ने जांच की मांग करते हुए बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा मामले की न्यायिक जांच के साथ SC-ST मामलों में ऑनलाइन FIR की सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की।
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