Last updated: August 31st, 2026 at 10:49 am

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बीच नुवाकोट जिले के एक स्कूल से राहत की खबर सामने आई है। त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी ने समय रहते फैसला लेकर स्कूल में मौजूद 1,643 छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
चेतावनी मिलते ही बजाई स्कूल की घंटी
बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी को एक परिचित से जानकारी मिली कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और आसपास के गांव खतरे की चपेट में हैं। थोड़ी देर बाद एक अभिभावक भी स्कूल पहुंचा और बाढ़ का पानी तेजी से इलाके की ओर बढ़ने की जानकारी दी।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए दवाडी ने किसी और सूचना का इंतजार नहीं किया। उन्होंने तुरंत स्कूल की घंटी बजाई और शिक्षकों को सभी छात्रों को कक्षाओं से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने का निर्देश दिया।
स्कूल बसों को भी लौटने को कहा
प्रिंसिपल ने स्कूल बस चालकों से भी संपर्क किया और जहां संभव था, वहां बसों को वापस लौटने के लिए कहा। उनका मकसद किसी भी तरह बच्चों को बाढ़ के संभावित रास्ते से दूर करना था।
स्कूल की इमारत कंक्रीट से बनी थी और नदी से करीब 60 मीटर ऊंचाई पर स्थित थी। शुरुआत में दवाडी को लगा कि भवन सुरक्षित रहेगा, लेकिन पानी और मलबे का बहाव बढ़ने के साथ हालात तेजी से बदलने लगे।
डर के बीच बच्चों को सुरक्षित जगह पहुंचाया
बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच छात्र स्कूल परिसर से निकलने लगे। एक छात्रा घबराहट के कारण बेहद परेशान हो गई, जिसके बाद उसे मोटरसाइकिल के जरिए ऊंचे स्थान पर पहुंचाया गया। कई अन्य बच्चे पैदल ही सुरक्षित स्थान की ओर गए।
प्रिंसिपल दवाडी भी छात्रों के साथ रहे और यह सुनिश्चित करते रहे कि सभी बच्चे सुरक्षित जगह तक पहुंच जाएं। बाद में छात्रों के समूह ने एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण ली, जबकि आसपास कीचड़, पत्थर और मलबे के साथ तेज पानी बह रहा था।
स्कूल को हुआ भारी नुकसान
बाढ़ का प्रभाव इतना तेज था कि स्कूल की इमारतों को भी काफी नुकसान पहुंचा। आसपास के कई हिस्से पानी के तेज बहाव में बह गए। दवाडी के समय पर लिए गए फैसले से स्कूल में मौजूद 1,643 बच्चों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली। हालांकि, इस त्रासदी में स्कूल के दो कर्मचारियों की जान चली गई।
दो कर्मचारियों की भी गई जान
स्कूल के सोशल हिस्ट्री शिक्षक संतोष परियार की नदी के पास स्थित किराए के कमरे में लौटने के बाद बाढ़ में बह जाने से मौत हो गई। वहीं, स्कूल के सफाईकर्मी सुल्तान लामा भी दरवाजे बंद करने के लिए वापस लौटे थे, लेकिन बाढ़ के बीच उनकी जान चली गई।
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा ने जहां भारी तबाही मचाई, वहीं राजेंद्र दवाडी का समय पर लिया गया फैसला यह दिखाता है कि आपदा के दौरान कुछ मिनटों में लिया गया सही निर्णय कितनी जिंदगियां बचा सकता है।
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