Last updated: August 31st, 2026 at 11:15 am

नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया के तहत सोमवार को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई। ड्राफ्ट सूची में करीब 97.5 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि लगभग 47.7 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित अवधि में दावा और आपत्ति दाखिल करके अपना नाम दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। SIR के दौरान जिन मतदाताओं के Enumeration Forms प्राप्त होकर डिजिटल किए गए, उनमें से लगभग 97.5 लाख लोगों के नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल किए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 67.21 प्रतिशत है। बाकी मतदाताओं को फिलहाल ‘Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others’ यानी ASDDO श्रेणी में रखा गया है।
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर हो गया है। ऐसे मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 के बीच दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए Form 6 के साथ आवश्यक घोषणा और संबंधित दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को अपना नाम दोबारा सूची में शामिल कराने का अवसर देना है।
SIR की इस प्रक्रिया में मतदाताओं के मौजूदा रिकॉर्ड को पुराने चुनावी रिकॉर्ड से मिलाने की भी कोशिश की गई है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां मिली हैं जिनकी आगे जांच की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस दिया जा सकता है। करीब 34 प्रतिशत मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी न किसी प्रकार की विसंगति होने की संभावना बताई गई है।
रिकॉर्ड में विसंगति के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज नाम और 2002 की पुरानी सूची में नाम के बीच अंतर, मतदाता और माता-पिता की उम्र के बीच असामान्य अंतर या परिवार के सदस्यों के जन्म रिकॉर्ड में असंगति जैसे मामले शामिल हैं। ऐसी स्थिति में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी संबंधित मतदाता से अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकता है।
निर्वाचन आयोग ने अलग-अलग परिस्थितियों में पहचान और जन्म संबंधी दस्तावेजों के लिए कई विकल्प सुझाए हैं। इनमें जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक या शैक्षणिक प्रमाणपत्र, सरकारी अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी या पेंशनर पहचान पत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और सरकार द्वारा जारी अन्य दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। आवश्यक दस्तावेज व्यक्ति की जन्मतिथि और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
SIR प्रक्रिया में रिकॉर्ड सत्यापन का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में सही नाम और विवरण होना चुनावी अधिकार से सीधे जुड़ा हुआ है। वहीं निर्वाचन विभाग के सामने मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाने की जिम्मेदारी भी होती है।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब प्रक्रिया का अगला चरण दावा और आपत्तियों का है। इस दौरान जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से ड्राफ्ट सूची से बाहर हुआ है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। निर्वाचन अधिकारी इन दावों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद आवश्यक निर्णय लेंगे।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR से संबंधित जानकारी और मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई है। नागरिक अपने रिकॉर्ड की स्थिति की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक दावा और आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
दिल्ली में SIR के तहत सोमवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई। करीब 97.5 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, जबकि लगभग 47.7 लाख नाम फिलहाल शामिल नहीं हैं। इन मतदाताओं को 31 अगस्त से 30 सितंबर तक Form 6 और आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करने का मौका मिलेगा। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
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