Last updated: August 31st, 2026 at 11:17 am

नई दिल्ली: दिल्ली में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के करीब 34 प्रतिशत मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी न किसी तरह की विसंगति पाई गई है। ऐसे मतदाताओं के रिकॉर्ड की आगे जांच की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर उनसे अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
SIR का उद्देश्य दिल्ली की मतदाता सूची को अपडेट करना और ऐसे नामों की पहचान करना है जो मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अब पात्र मतदाता नहीं हैं। इस प्रक्रिया में मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड की पुराने चुनावी रिकॉर्ड से भी तुलना की जा रही है। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, रिकॉर्ड में किसी तरह की असंगति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम स्वतः मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।
जांच के दौरान कई प्रकार की विसंगतियां सामने आ सकती हैं। इनमें मतदाता के वर्तमान रिकॉर्ड और पुराने चुनावी रिकॉर्ड में नाम या अन्य विवरण का मेल न होना, परिवार के सदस्यों की उम्र में असामान्य अंतर, जन्म संबंधी जानकारी में अंतर या पुराने रिकॉर्ड से लिंक स्थापित नहीं हो पाना शामिल हो सकता है।
ऐसे मामलों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी संबंधित मतदाता से अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकते हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि मतदाता का नाम सूची में बनाए रखा जाना है या रिकॉर्ड में किसी प्रकार का सुधार किया जाना है।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत सोमवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची भी जारी की गई। इसमें करीब 97.5 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि करीब 47.7 लाख नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने वाले लोगों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं है, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 के बीच निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए Form 6 और आवश्यक घोषणा तथा दस्तावेज जमा करने होंगे। अधिकारियों द्वारा इन दावों की जांच के बाद पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जा सकते हैं।
SIR के दौरान रिकॉर्ड की जांच का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का आधार होती है। एक तरफ निर्वाचन विभाग का उद्देश्य सूची से मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाकर उसे अधिक सटीक बनाना है, वहीं दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम गलती से बाहर न हो जाए।
रिकॉर्ड में विसंगति मिलने पर मतदाताओं को घबराने के बजाय अपने दस्तावेज व्यवस्थित रखने की सलाह दी जा रही है। जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक या अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र, सरकारी पहचान पत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और अन्य निर्धारित सरकारी दस्तावेज जरूरत के अनुसार उपयोग किए जा सकते हैं।
निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर विसंगति का मतलब मतदाता को अपात्र घोषित करना नहीं है। कई बार पुराने रिकॉर्ड में नाम की spelling, उम्र या अन्य विवरण अलग होने के कारण भी mismatch सामने आ सकता है। ऐसे मामलों में उपलब्ध दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड देखकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज है। मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों के ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं होने के कारण नागरिकों को अपने नाम की स्थिति जांचने की सलाह दी जा रही है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि दावा और आपत्ति की निर्धारित प्रक्रिया इसी उद्देश्य से रखी गई है ताकि पात्र लोगों को अपना रिकॉर्ड ठीक कराने का अवसर मिले।
नागरिक दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के माध्यम से अपने मतदाता रिकॉर्ड और SIR से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है तो उसे निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा दाखिल करना चाहिए।
दावा और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इसके बाद संशोधित अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को जारी की जानी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, SIR जैसी प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड और पुराने चुनावी आंकड़ों का मिलान मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन रिकॉर्ड में मौजूद पुराने डेटा की गुणवत्ता और नागरिकों को पर्याप्त अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 34 प्रतिशत मतदाता रिकॉर्ड में किसी न किसी तरह की विसंगति सामने आने की जानकारी है। इन रिकॉर्ड की जरूरत के अनुसार आगे जांच की जा सकती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विसंगति मिलना अपने आप नाम हटाए जाने का आधार नहीं है। वहीं ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने वाले मतदाताओं को 30 सितंबर तक दावा दाखिल करने का मौका दिया गया है। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होने की संभावना है।
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