Last updated: September 1st, 2026 at 02:36 pm

दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल से कथित तौर पर अगवा किए गए तीन साल के बच्चे को पुलिस ने कई सौ किलोमीटर दूर बिहार के मुंगेर जिले से बरामद कर लिया है। मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने कथित तौर पर बच्चे को अपने साथ ले जाकर उसे अपना बच्चा बताने की कोशिश की। मामले की जांच दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस के समन्वय से की गई।
पुलिस के मुताबिक, बच्चा दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल परिसर से लापता हुआ था। परिवार ने बच्चे के गायब होने की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत तलाश शुरू की। अस्पताल और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जांचकर्ताओं ने बच्चे के अस्पताल से बाहर जाने के संभावित रास्तों और वहां मौजूद लोगों की गतिविधियों का भी विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पुलिस को एक महिला पर शक हुआ। तकनीकी निगरानी और अन्य सुरागों के आधार पर जांच बिहार के मुंगेर तक पहुंची। पुलिस टीम ने वहां कार्रवाई कर महिला को पकड़ा और उसके कब्जे से बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला की छह बेटियां हैं और वह कथित तौर पर एक बेटे की चाहत रखती थी। इसी वजह से उसने बच्चे को अगवा करने की योजना बनाई हो सकती है। हालांकि इस दावे की पूरी पुष्टि जांच और आरोपी के बयान के आधार पर की जाएगी।
बच्चे के बरामद होने के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षित परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की। बच्चे की मेडिकल जांच भी कराई गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके साथ किसी तरह की शारीरिक चोट या अन्य नुकसान तो नहीं हुआ।
जांचकर्ताओं ने आरोपी महिला से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की कि उसने बच्चे को अस्पताल से किस तरह बाहर निकाला और उसे बिहार तक कैसे लेकर गई। पुलिस यह भी पता कर रही है कि इस अपराध में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या महिला ने अकेले ही पूरी वारदात को अंजाम दिया।
अस्पताल से बच्चे के गायब होने के बाद CCTV फुटेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और कर्मचारी मौजूद रहते हैं। ऐसे में पुलिस ने उस समय अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों की भी जांच की।
बच्चे को दिल्ली से बिहार ले जाना इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान आरोपी महिला ने बच्चे को किस तरह अपने साथ रखा और किसी को उस पर शक क्यों नहीं हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब आरोपी महिला के मोबाइल फोन, यात्रा से संबंधित जानकारी और संभावित संपर्कों की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उसने घटना से पहले या बाद में किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क किया था या नहीं।
मामले में बच्चे की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून के तहत उसकी पहचान सुरक्षित रखना आवश्यक है।
घटना ने अस्पतालों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पतालों में मरीजों के साथ आने वाले लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है। विशेष रूप से छोटे बच्चों के मामले में अभिभावकों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
पुलिस का कहना है कि बच्चे को सुरक्षित बरामद करना जांच की सबसे बड़ी सफलता है। अब जांच का फोकस अपहरण की पूरी परिस्थितियों और आरोपी महिला की मंशा को स्पष्ट करने पर है।
आरोपी महिला को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा। उसके खिलाफ अपहरण और अन्य लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। मामले में आगे की धाराएं जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि बच्चे को उसके परिवार के पास सुरक्षित रखा जाए और घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
दिल्ली के सरकारी अस्पताल से लापता हुआ तीन साल का बच्चा बिहार के मुंगेर में सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में महिला पर बच्चे को अगवा कर उसे अपने बेटे के रूप में रखने की कोशिश करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि घटना में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
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