Last updated: September 2nd, 2026 at 03:02 pm

पटना मेट्रो परियोजना के भूमिगत निर्माण कार्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर में लगभग 5.2 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई पूरी कर ली गई है। इस सफलता से पटना जंक्शन और मेट्रो नेटवर्क के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच भूमिगत कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ा है। परियोजना से जुड़े अपडेट के अनुसार इस चरण में टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने अपना निर्धारित भूमिगत खंड पूरा किया है।
पटना मेट्रो परियोजना के तहत शहर में भूमिगत और एलिवेटेड दोनों तरह के कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। भूमिगत हिस्से का निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मशीनों को घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र के नीचे से सुरंग बनानी पड़ती है। इसके लिए TBM जैसी अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 5.2 किलोमीटर के इस भूमिगत हिस्से की खुदाई पूरी होना निर्माण एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण प्रगति है।
ताजा जानकारी के मुताबिक यह भूमिगत स्ट्रेच मोइन-उल-हक स्टेडियम से पटना जंक्शन के बीच का हिस्सा है। TBM के लगातार काम करने के बाद इस खंड में सुरंग निर्माण का एक बड़ा चरण पूरा हुआ है। इस सफलता के बाद सुरंग के भीतर ट्रैक, बिजली, सिग्नलिंग, वेंटिलेशन और अन्य मेट्रो प्रणालियों से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।
भूमिगत मेट्रो निर्माण में केवल सुरंग खोदना ही पर्याप्त नहीं होता। खुदाई पूरी होने के बाद सुरंग की संरचनात्मक सुरक्षा, लाइनिंग, जल निकासी और यात्रियों के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होती है। इसके बाद मेट्रो ट्रैक और इलेक्ट्रिकल तथा सिग्नलिंग सिस्टम स्थापित किए जाते हैं। इसलिए 5.2 किलोमीटर की खुदाई पूरी होना एक बड़ा चरण है, लेकिन पूरे कॉरिडोर को यात्री सेवा के लिए तैयार करने के लिए अभी कई तकनीकी कार्य बाकी रहेंगे।
पटना जैसे तेजी से बढ़ते शहर में मेट्रो परियोजना को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर की सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और प्रमुख इलाकों को तेज सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने के लिए मेट्रो नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। भूमिगत कॉरिडोर विशेष रूप से घनी आबादी और व्यस्त शहरी क्षेत्रों में सड़क के ऊपर अतिरिक्त जगह लिए बिना परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
पटना जंक्शन शहर के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन केंद्रों में से एक है। यहां रेलवे यात्रियों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय यात्री भी पहुंचते हैं। मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित होने के बाद रेलवे स्टेशन और शहर के दूसरे प्रमुख हिस्सों के बीच आवागमन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। इससे रोजाना काम, पढ़ाई और व्यापार के लिए यात्रा करने वाले लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के भूमिगत हिस्से में TBM का इस्तेमाल निर्माण की गति और सुरक्षा दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मशीन जमीन के नीचे नियंत्रित तरीके से खुदाई करती है और सुरंग की संरचना को तैयार करने में सहायता करती है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस तकनीक का इस्तेमाल इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे सतह पर बड़े पैमाने पर खुदाई करने की आवश्यकता कम होती है।
पटना मेट्रो की यह उपलब्धि बिहार की राजधानी में आधुनिक शहरी परिवहन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, यात्रियों के लिए पूरी सुविधा उपलब्ध होने से पहले निर्माण, सिस्टम इंस्टॉलेशन, परीक्षण और सुरक्षा मंजूरी जैसे कई चरण पूरे किए जाने बाकी हैं।
पटना मेट्रो में 5.2 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग की खुदाई पूरी होना परियोजना के निर्माण कार्य में एक बड़ा मील का पत्थर है। मोइन-उल-हक स्टेडियम से पटना जंक्शन के बीच भूमिगत कनेक्टिविटी तैयार होने की दिशा में अब अगले निर्माण चरणों पर ध्यान दिया जाएगा।
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