Last updated: September 2nd, 2026 at 03:16 pm

बिहार सरकार ने राज्य में बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पटना से ‘जांच एवं उपचार—चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का लक्ष्य राज्य के 38 जिलों में करीब 6 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच करना और उनके डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करना है। अभियान 2 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों, पंचायतों और घर-घर जाकर लोगों की शुरुआती स्वास्थ्य जांच करेंगी। विशेष रूप से 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को जांच के दायरे में रखा गया है। सरकार का उद्देश्य बीमारियों का पता उस समय लगाना है जब उनका इलाज अपेक्षाकृत आसान हो, ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले मरीज को उचित चिकित्सा सहायता मिल सके।
सरकार के मुताबिक अभियान के दौरान मधुमेह, उच्च रक्तचाप, विभिन्न प्रकार के कैंसर, हृदय रोग, सांस और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों, फैटी लिवर और टीबी जैसी बीमारियों की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति में बीमारी के संकेत मिलते हैं तो उसे आवश्यक चिकित्सा सलाह, दवाएं और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करना है। सरकार का लक्ष्य जांच के दौरान सामने आने वाली बीमारियों और उपचार से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप में दर्ज करना है। इन रिकॉर्ड को आगे मरीज के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार ने इन्हें ABHA ID से जोड़ने की दिशा में भी काम करने की बात कही है, जिससे मरीज के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी भविष्य में अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो सके।
अभियान के लिए राज्य के सभी 38 जिलों में जागरूकता वाहन रवाना किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों को जांच के महत्व के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने और आवश्यकता के अनुसार उपचार उपलब्ध कराने में मदद करेंगी। सरकार ने जिलों के अधिकारियों को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी है।
महिलाओं के स्वास्थ्य को भी इस अभियान में विशेष महत्व दिया गया है। सरकार के अनुसार बिहार में महिलाओं में एनीमिया की समस्या काफी व्यापक है। इसी को देखते हुए लगभग एक करोड़ महिलाओं और लड़कियों की जांच करने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे महिलाओं में खून की कमी समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और इलाज को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला स्तर पर मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में पहले 36 तरह की बीमारियों के लिए सर्जरी की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर 45 से अधिक प्रकार की बीमारियों तक किया गया है। जिला अस्पतालों में सर्जरी और ICU सुविधाओं का विस्तार करने के साथ डॉक्टरों और नर्सों की भर्ती पर भी काम चल रहा है।
सरकार का दावा है कि इस अभियान से स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर के करीब पहुंचाने में मदद मिलेगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ऐसे लोगों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है जो नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल नहीं पहुंच पाते। घर पर शुरुआती जांच होने के बाद गंभीर बीमारी की आशंका वाले मरीजों को आगे के इलाज के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
अभियान की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वास्थ्यकर्मी कितने प्रभावी तरीके से घर-घर पहुंचते हैं और जांच में सामने आने वाले मरीजों को आगे उपचार मिलता है या नहीं। केवल डिजिटल रिकॉर्ड बनाना पर्याप्त नहीं होगा; बीमारी की पहचान के बाद दवा, विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यक उपचार की निरंतर व्यवस्था भी जरूरी होगी।
बिहार सरकार ने 6 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य रखते हुए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। 2 सितंबर से 30 नवंबर तक चलने वाली इस पहल में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की घर-घर जांच, गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर रहेगा।
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