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जीतन राम मांझी की तबीयत फिर बिगड़ी, पटना से दिल्ली हुए रवाना; आरक्षण को लेकर भी रहे मुखर

पटना: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी की तबीयत एक बार फिर खराब होने
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पटना: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी की तबीयत एक बार फिर खराब होने की खबर है। स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं होने के बाद वह गुरुवार, 3 सितंबर को बेहतर इलाज के लिए पटना से दिल्ली रवाना हो गए। उनके साथ परिवार के कुछ सदस्य भी दिल्ली गए हैं।

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    पटना के अस्पताल में चल रहा था इलाज

    बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से जीतन राम मांझी की तबीयत खराब चल रही थी। हाल ही में उन्हें इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार बुखार आने और स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने के बाद अब उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला किया गया है।

    आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान से अलग रहा रुख

    स्वास्थ्य संबंधी खबरों के बीच जीतन राम मांझी पिछले कुछ समय से आरक्षण के मुद्दे पर भी लगातार अपनी राय रखते रहे हैं। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ उनके विचार अलग रहे हैं। चिराग पासवान आरक्षण की समीक्षा के विचार का विरोध कर चुके हैं, जबकि मांझी और उनकी पार्टी अनुसूचित जाति के आरक्षण में सब-कोटे के बंटवारे की पैरवी करते रहे हैं।

    SC के फैसले के अनुरूप सब-कोटे की मांग

    मांझी का तर्क रहा है कि 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को अनुसूचित जाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण यानी सब-कैटेगरी बनाने की अनुमति दी थी। उनका कहना है कि इस व्यवस्था के जरिए उन वंचित समुदायों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाया जा सकता है, जिन्हें लंबे समय से इसका पर्याप्त फायदा नहीं मिल पाया।

    उन्होंने दावा किया था कि आरक्षण का लाभ कुछ सीमित वर्गों तक अधिक पहुंचने के कारण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समुदाय पीछे रह जाते हैं। मांझी ने पंजाब में आरक्षण के भीतर बंटवारे का उदाहरण देते हुए कहा था कि ऐसी व्यवस्था से पहले से कम लाभ पाने वाले समूहों को भी अवसर मिल सकता है।

    बिहार में भी आरक्षण के बंटवारे की वकालत

    जीतन राम मांझी बिहार में दलित और महादलित वर्गों के संदर्भ में भी आरक्षण के लाभ के समान वितरण की बात करते रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावना के अनुरूप आरक्षण के भीतर वर्गीकरण किया जाना चाहिए, ताकि उन समुदायों को भी प्रतिनिधित्व मिल सके जो अब तक इसका पर्याप्त लाभ नहीं उठा पाए हैं।

    फिलहाल मांझी के दिल्ली रवाना होने के बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ गई है

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