Last updated: September 3rd, 2026 at 08:08 am

नई दिल्ली: दिल्ली एम्स में 15 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। तन्वी जन्मजात हृदय संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। परिवार का आरोप है कि वर्षों तक इलाज और हार्ट सर्जरी के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें लगातार इंतजार करना पड़ा। वहीं, एम्स ने मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर बीमारी की जटिलता को इलाज की चुनौती बताया है।
2012 में पहली बार AIIMS पहुंची थी तन्वी
तन्वी के पिता मुकेश परियानी के अनुसार, वह अपनी बेटी को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को एम्स लेकर पहुंचे थे। उनका दावा है कि शुरुआती जांच और इलाज की प्रक्रिया में ही काफी समय बीत गया।
परिवार का आरोप है कि 4 अप्रैल 2014 को डॉक्टरों की सलाह पर सर्जरी के लिए पैसे और खून की व्यवस्था की गई थी, लेकिन ऑपरेशन आगे टलता रहा। पिता के मुताबिक, 2015 तक सर्जरी नहीं हो सकी और इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर पीएमओ में शिकायत भी की।
परिवार ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
मुकेश परियानी का आरोप है कि शिकायत के बाद अस्पताल की ओर से उन्हें बुलाया गया और उनसे शिकायत वापस लेने के लिए कहा गया। परिवार का कहना है कि बाद के वर्षों में भी उन्होंने कई बार इलाज और सर्जरी को लेकर शिकायतें कीं।
पिता ने आरोप लगाया कि 2025 और फरवरी 2026 में भी शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें अपेक्षित इलाज नहीं मिल सका। उनका कहना है कि अगर समय रहते सर्जरी हो जाती तो शायद उनकी बेटी आज जीवित होती।
बेटी की मौत के बाद FIR की तैयारी
तन्वी की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। पिता मुकेश परियानी ने कहा कि वह अपनी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदारी तय कराने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराएंगे।
परिवार का आरोप है कि करीब 11 वर्षों तक इलाज के लिए एम्स के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला।
AIIMS ने बीमारी को बताया बेहद जटिल
दूसरी ओर, एम्स दिल्ली ने मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि तन्वी वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी जटिल जन्मजात हृदय बीमारी से पीड़ित थी।
एम्स के अनुसार, 2017 में विशेषज्ञों के पैनल ने उसकी स्थिति का मूल्यांकन किया था। मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक, हृदय की जटिल संरचना के कारण सर्जरी को बेहद जोखिमपूर्ण माना गया था और दवाइयों के जरिए इलाज की सलाह दी गई थी।
1 सितंबर को बिगड़ी थी तबीयत
एम्स के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 की सुबह करीब 2:50 बजे तन्वी की हालत अचानक बिगड़ी। उसे अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई और उसका ऑक्सीजन स्तर 48 प्रतिशत तक गिर गया।
अस्पताल का कहना है कि डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए लंबे समय तक प्रयास किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
2012 से 2026 तक के रिकॉर्ड की होगी समीक्षा
तन्वी की मौत और इलाज में कथित देरी को लेकर एम्स निदेशक ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। समिति 2012 से 2026 तक के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड, ओपीडी विजिट, जांच और मेडिकल प्रक्रिया की समीक्षा करेगी।
इसके अलावा 2017 में विशेषज्ञों द्वारा सर्जरी को लेकर लिए गए फैसले की भी जांच होगी। समिति यह देखेगी कि क्या इलाज या सर्जरी में किसी स्तर पर देरी हुई थी या तन्वी की चिकित्सकीय स्थिति ऐसी थी जिसमें ऑपरेशन करना अत्यधिक जोखिमपूर्ण था।
अब इस जांच के जरिए परिवार के आरोपों और अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड के बीच की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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