Last updated: September 6th, 2026 at 03:19 pm

दिल्ली सरकार राजधानी में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सरकार की प्रस्तावित ड्रोन पॉलिसी के तहत ड्रोन का इस्तेमाल खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने, निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल, यमुना किनारे कचरा फेंकने और अतिक्रमण की निगरानी के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील इलाकों की निगरानी और आपातकालीन स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल प्रस्तावित है।
ड्राफ्ट नीति के मुताबिक अगले पांच वर्षों में दिल्ली में ड्रोन से जुड़े क्षेत्र को विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 25 से अधिक ड्रोन कंपनियों को विकसित करने, कम से कम 5,000 लोगों को प्रशिक्षण देने और 1,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना है। सरकार ने 2026-27 से 2030-31 के बीच ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करने के लिए लगभग 85 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्तावित नीति में ड्रोन का सबसे महत्वपूर्ण इस्तेमाल निगरानी और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों में किया जा सकता है। ड्रोन वास्तविक समय में प्रदूषण वाले इलाकों की निगरानी, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल और खुले में आग जलाने जैसी गतिविधियों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। इससे संबंधित विभागों को प्रदूषण के स्रोत तक जल्दी पहुंचने और आवश्यक कार्रवाई करने में सहायता मिल सकती है।
यमुना नदी और उसके आसपास के इलाकों की निगरानी भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ड्रोन के जरिए नदी किनारे अवैध कचरा डंपिंग, अतिक्रमण और प्रदूषण के संभावित स्रोतों की पहचान की जा सकती है। नगर निकाय इनका इस्तेमाल लैंडफिल साइट, कचरे के जमाव और सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए भी कर सकते हैं। इससे उन इलाकों की निगरानी आसान हो सकती है जहां जमीन पर लगातार निरीक्षण करना मुश्किल होता है।
महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल प्रस्तावित है। दिल्ली पुलिस और गृह विभाग संवेदनशील तथा ज्यादा भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए स्थिति का आकलन कर सकते हैं। किसी आपात स्थिति में ड्रोन घटनास्थल की तस्वीर और वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराकर जमीन पर मौजूद सुरक्षा या राहत टीमों को तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।
सरकार ड्रोन क्षेत्र में प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। प्रस्ताव में कम से कम 10 रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन, कई स्किलिंग सेंटर और शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना है। प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को फीस में 50 प्रतिशत तक सहायता, अधिकतम 5,000 रुपये तक की मदद और सरकारी संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वालों के लिए 5,000 रुपये के स्टाइपेंड का प्रस्ताव रखा गया है।
ड्रोन कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को आकर्षित करने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी प्रस्तावित हैं। पात्र इकाइयों को फिक्स्ड कैपिटल निवेश पर 20 प्रतिशत तक की पूंजी सब्सिडी मिल सकती है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 5 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इसके अलावा रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 20 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान भी रखा गया है।
प्रस्तावित नीति में ड्रोन संचालन के लिए अलग से कोई नया नियामक ढांचा बनाने की योजना नहीं है। ड्रोन संचालन केंद्रीय नियमों, जिसमें Drone Rules, 2021 भी शामिल हैं, और सक्षम अधिकारियों के निर्देशों के तहत ही किया जाएगा। सरकार पहले ड्राफ्ट नीति को जनता के सामने रखकर सुझाव और आपत्तियां लेगी। इसके बाद समीक्षा के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। दिल्ली सरकार की योजना सितंबर के अंत तक नीति को सार्वजनिक करने की है।
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