Last updated: September 8th, 2026 at 01:21 pm

वडोदरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में आयोजित ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम में करीब ₹35 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर समेत कई परियोजनाओं को देश के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास के लिए अहम बताया।
फ्रेट कॉरिडोर को 21वीं सदी की बड़ी उपलब्धि बताया
पीएम मोदी ने करीब 2,800 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना देश में माल परिवहन को तेज करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इसे 21वीं सदी की बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया और कहा कि इससे देश के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की कल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान इस दिशा में अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ।
‘नाराज फूफा’ वाले बयान से साधा निशाना
फ्रेट कॉरिडोर के कारण ट्रकों और ट्रक ड्राइवरों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर सवाल उठाने वालों पर पीएम मोदी ने बिना किसी का नाम लिए व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि अब ‘नाराज फूफा जी’ यह पूछते हुए दिखाई देंगे कि ट्रक ड्राइवरों का क्या होगा।
इसी संदर्भ में पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि अब ‘फूफा जी’ के पास भी काम है। उनके इस बयान को विपक्ष पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है।
यात्री और मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक का फायदा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को कई जगहों पर एक ही रेल ट्रैक का इस्तेमाल करना पड़ता था। इससे दोनों तरह के परिवहन की गति प्रभावित होती थी।
उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस व्यवस्था को बदलने में मदद की है। इसके जरिए माल ढुलाई के लिए अलग रेल नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है।
आत्मनिर्भर भारत और सप्लाई चेन पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि फ्रेट कॉरिडोर का उद्देश्य केवल माल ढुलाई को तेज करना नहीं है, बल्कि देश की सप्लाई चेन को मजबूत बनाना भी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से उन क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा, जहां आजादी के बाद लंबे समय तक रेल सुविधा नहीं पहुंच सकी थी।
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