Last updated: September 8th, 2026 at 03:12 pm

दिल्ली के सत्यानिकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। रविवार को हुए इस हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ, दिल्ली दमकल विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें कई घंटे तक मौके पर जुटी रहीं।
हादसा रविवार दोपहर सत्यानिकेतन इलाके में हुआ। अचानक पूरी इमारत ढहने से आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। इमारत में छात्र और अन्य लोग रहते थे। सूचना मिलने के बाद राहत दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की गई।
बचाव अभियान के दौरान भारी मशीनों की मदद से मलबे को धीरे-धीरे हटाया गया। राहतकर्मियों ने संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने के लिए कई हिस्सों की सावधानीपूर्वक जांच की। अधिकारियों के अनुसार, कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद हादसे में मरने वालों की संख्या सात हो गई।
घटना के बाद आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। संभावित खतरे को देखते हुए आसपास की इमारतों की भी जांच की गई। अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए। राहत टीमों ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी तलाशी अभियान जारी रखा कि मलबे के अंदर कोई अन्य व्यक्ति न फंसा हो।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत से संबंधित काम चल रहा था। हालांकि, बिल्डिंग के गिरने की वास्तविक वजह अभी जांच का विषय है। संबंधित विभाग इमारत की संरचना, निर्माण गतिविधियों और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहे हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही हादसे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
सत्यानिकेतन में बड़ी संख्या में छात्र पीजी और किराए के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद यहां रहने वाले छात्रों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई लोगों ने किराए की इमारतों की नियमित जांच और भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
हादसे ने राजधानी में पीजी और किराए के मकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली के कई इलाकों में पुरानी इमारतों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में छात्रों और कामकाजी लोगों के रहने के लिए किया जाता है। ऐसी इमारतों में अतिरिक्त निर्माण, मरम्मत या बेसमेंट से जुड़े काम के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन कितना हो रहा है, इसकी जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रशासन की ओर से राहत कार्य में लगे अधिकारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। घायलों के उपचार पर भी ध्यान दिया गया। मृतकों के परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में चल रहे काम और उसके ढहने के बीच कोई संबंध था या नहीं।
घटना के बाद भवन सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यदि जांच में निर्माण नियमों या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सत्यानिकेतन का यह हादसा राजधानी में भवनों की सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की जरूरत को फिर सामने लाता है। खासकर छात्र इलाकों में पीजी और किराए के भवनों की संरचनात्मक स्थिति की निगरानी जरूरी है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान राहत कार्य पूरा करने, घायलों के उपचार और हादसे के वास्तविक कारण का पता लगाने पर है।
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