Last updated: September 9th, 2026 at 10:31 am

इजरायल और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। 8 सितंबर 2026 को ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से होने वाले कुछ आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। ब्रिटेन के साथ फ्रांस और कनाडा ने भी इसी दिशा में कदम उठाने का ऐलान किया।
इसके कुछ ही समय बाद इजरायल की ओर से भी कड़ा जवाब सामने आया। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटेन के खिलाफ कई राजनयिक कदमों की घोषणा की, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव और बढ़ गया।
वेस्ट बैंक की बस्तियों को लेकर टकराव
ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने संसद में कहा कि वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का विस्तार चिंता का गंभीर विषय बन चुका है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि बस्तियों का विस्तार फिलिस्तीनी राज्य की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है।
विवाद का एक प्रमुख कारण E1 क्षेत्र में प्रस्तावित नए आवासों से जुड़ा है। यह इलाका वेस्ट बैंक के महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ता है और यहां बड़े पैमाने पर निर्माण को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपत्तियां जताई जाती रही हैं।
‘जातीय सफाई’ के आरोप से बढ़ा विवाद
ब्रिटेन की ओर से वेस्ट बैंक के कुछ इलाकों में फिलिस्तीनियों की कथित ‘जातीय सफाई’ का मुद्दा उठाए जाने के बाद इजरायल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटिश आरोपों को खारिज करते हुए इसे इजरायल के खिलाफ गंभीर और अपमानजनक आरोप बताया। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
12 देशों ने जताई चिंता
वेस्ट बैंक की स्थिति को लेकर 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त रुख भी सामने रखा। बयान में दो-राज्य समाधान को बनाए रखने और स्थायी शांति के लिए कदम उठाने पर जोर दिया गया। इस समूह में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा शामिल हैं। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी वेस्ट बैंक की स्थिति पर चिंता जताते हुए बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनियों के खिलाफ बसने वालों की हिंसा को गंभीर मुद्दा बताया।
इजरायल के सामने बढ़ रही कूटनीतिक चुनौती
इन घटनाक्रमों को इजरायल के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर पश्चिमी देशों की ओर से बस्तियों, फिलिस्तीनी नागरिकों की स्थिति और दो-राज्य समाधान को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
हालांकि, इजरायल अपनी सुरक्षा और नीतिगत फैसलों को लेकर अलग रुख रखता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इजरायल और उसके पश्चिमी सहयोगी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर इस विवाद का असर देखने को मिल सकता है।
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