Last updated: September 14th, 2026 at 12:35 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में 48 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि कई प्रमुख नदियों का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। इसके बावजूद कई स्थानों पर नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, इसलिए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान जारी रखा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ से 15 जिलों के 87 प्रखंडों और 575 ग्राम पंचायतों में रहने वाले करीब 48.35 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय और अररिया सहित कई जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। बड़ी संख्या में गांवों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए प्रशासन की मदद पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर सामुदायिक रसोई और राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से 1,251 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं, जहां अब तक बड़ी संख्या में लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 13 राहत शिविरों में करीब 12 हजार लोगों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
बचाव और राहत अभियान में NDRF और SDRF की टीमें भी लगातार काम कर रही हैं। करीब 10 NDRF और 27 SDRF टीमें अलग-अलग प्रभावित जिलों में तैनात हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान की आवाजाही के लिए बड़ी संख्या में नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता उन इलाकों तक राहत पहुंचाना है जहां सड़क संपर्क बाढ़ के कारण प्रभावित हुआ है।
बाढ़ की स्थिति में सुधार के संकेत मिलने के बावजूद सभी इलाकों में खतरा खत्म नहीं हुआ है। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियां कई स्थानों पर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर हैं। वहीं कुछ जगहों पर जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है। गंगा का जलस्तर सुल्तानगंज में घट रहा है, जबकि वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का पानी बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
जलस्तर घटने के साथ प्रशासन के सामने एक नई चुनौती भी है। अचानक पानी कम होने से कुछ क्षेत्रों में मिट्टी और तटबंधों के कमजोर होने, कटाव तथा अन्य स्थानीय समस्याओं का खतरा बना रह सकता है। इसलिए अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों को भी नदी और कटाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
बिहार में राहत सामग्री का वितरण भी जारी है। सरकार के अनुसार, प्रभावित परिवारों को सहायता देने के साथ पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी की गई है, क्योंकि कई ग्रामीण परिवारों के लिए पशुधन आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस बीच राज्य में बाढ़ से निपटने के स्थायी उपायों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लगातार आने वाली बाढ़ के कारण नदी प्रबंधन, तटबंधों की स्थिति, जल निकासी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार पर दीर्घकालिक समाधान तैयार करने का दबाव बढ़ रहा है। फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान लोगों को सुरक्षित रखने, भोजन और चिकित्सा उपलब्ध कराने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी पर है।
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