Last updated: September 14th, 2026 at 12:38 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर राज्य के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बिहार की मौजूदा बाढ़ की स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावित लोगों के लिए केंद्र से ₹5 हजार करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के कई जिलों में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और उन्हें तत्काल अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिहार की स्थिति को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया और राहत संबंधी कदमों को अलग से देखा जाना जरूरी है। तेजस्वी के बयान को फिलहाल विपक्ष की राजनीतिक मांग और केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोप के रूप में देखा जा रहा है।
तेजस्वी यादव के अनुसार, उन्होंने 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और तत्काल ₹5 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री और बिहार से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों पर भी बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहायता हासिल नहीं कर पाने का आरोप लगाया।
तेजस्वी ने गुजरात और बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्र की प्रतिक्रिया की तुलना भी की। उनका आरोप है कि गुजरात में बाढ़ आने पर केंद्र की ओर से तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, जबकि बिहार में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होने के बावजूद वैसी तत्परता नहीं दिखाई गई। उन्होंने इसी आधार पर केंद्र पर बिहार के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ करने का आरोप लगाया है।
इधर, बाढ़ की वास्तविक स्थिति भी लगातार गंभीर बनी हुई है। 14 सितंबर को आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार के 15 जिलों में करीब 49.36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके थे। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
कई प्रमुख नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंगा सुल्तानगंज में खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर दर्ज की गई। इसके अलावा कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियों के अलग-अलग स्थानों पर भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है। इससे प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी रखने की जरूरत बनी हुई है।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई और राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। 14 सितंबर की जानकारी के अनुसार 1,260 सामुदायिक रसोई संचालित थीं और 13 राहत शिविरों में करीब 11,060 लोगों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। राहत और बचाव अभियान में SDRF की 27 तथा NDRF की 10 टीमें भी तैनात हैं।
तेजस्वी यादव की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में बाढ़ से निपटने के लिए तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान को लेकर भी बहस चल रही है। बिहार सरकार की ओर से भी बाढ़ की समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए नदी तंत्र और जल प्रबंधन पर काम करने की बात कही जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र से वित्तीय सहायता, राहत व्यवस्था और बाढ़ प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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