Last updated: September 14th, 2026 at 12:43 pm

बिहार के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का निधन हो गया है। 70 वर्षीय मस्तान ने दिल्ली के एम्स में इलाज के दौरान शनिवार देर शाम अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद बिहार के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। अलग-अलग दलों के नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताते हुए उन्हें सीमांचल की राजनीति का महत्वपूर्ण नेता बताया।
अब्दुल जलील मस्तान पूर्णिया जिले की अमौर विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे थे। उन्होंने पहली बार 1985 में अमौर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए और लंबे समय तक पार्टी से जुड़े रहे। उन्होंने 1985, 1990, 2000, 2005 के दोनों विधानसभा चुनावों और 2015 में अमौर सीट का प्रतिनिधित्व किया।
2015 में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद अब्दुल जलील मस्तान को नीतीश कुमार सरकार में मद्यनिषेध और उत्पाद विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके मंत्री रहते हुए बिहार में शराबबंदी लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया और 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई। इस वजह से उनका राजनीतिक जीवन बिहार की शराबबंदी नीति के शुरुआती दौर से भी जुड़ा रहा।
मस्तान ने अपनी राजनीति की शुरुआत ऐसे समय में की थी जब सीमांचल क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में थे। अमौर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव जीतने के कारण उन्होंने इलाके में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई। स्थानीय स्तर पर उन्हें आम लोगों से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता था और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की समस्याओं, विकास तथा स्थानीय जरूरतों को लेकर वह लगातार सक्रिय रहे।
उनके निधन पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया है। पूर्णिया जिले के कांग्रेस नेताओं ने उन्हें पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि क्षेत्र में संगठन और आम लोगों के बीच उनकी भूमिका लंबे समय तक याद की जाएगी। अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके निधन पर संवेदना जताई। अमौर के वर्तमान विधायक और एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने भी उन्हें जननेता बताते हुए श्रद्धांजलि दी।
मस्तान के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर भी जानकारी सामने आई है। उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव सिरसी ले जाया जा रहा है, जहां सोमवार को इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की संभावना है।
अब्दुल जलील मस्तान का राजनीतिक सफर करीब चार दशक से अधिक लंबा रहा। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में अमौर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और कांग्रेस के साथ अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखी। 2015 के बाद वह बिहार सरकार में मंत्री भी रहे। 2020 के विधानसभा चुनाव में वह अमौर सीट से चुनाव हार गए थे, जिसके बाद सक्रिय चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका पहले की तुलना में सीमित हो गई थी।
उनके निधन से बिहार कांग्रेस ने एक अनुभवी नेता खो दिया है। खास तौर पर सीमांचल क्षेत्र की राजनीति में उनकी लंबी मौजूदगी और छह बार विधायक रहने का रिकॉर्ड उन्हें राज्य के प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं में शामिल करता है। उनके समर्थकों के लिए यह केवल एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता का निधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की राजनीति के एक लंबे दौर का अंत भी माना जा रहा है।
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