Last updated: September 17th, 2026 at 02:31 pm

बिहार में सड़क और रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज परियोजनाओं के काम में तेजी लाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य में चल रही 58 रोड ओवरब्रिज यानी आरओबी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई है। समीक्षा के दौरान रेलवे से जुड़े तकनीकी मामलों, डिजाइन की मंजूरी, जमीन और अन्य अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि लंबित कार्यों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से पूरा किया जाए।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम को कम करना और सड़क यातायात को अधिक सुगम बनाना है। बिहार में कई ऐसे स्थान हैं जहां व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग के कारण वाहनों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। खासकर शहरों और प्रमुख बाजार क्षेत्रों में रेलवे फाटक बंद होने के दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। आरओबी बनने के बाद सड़क यातायात को रेलवे ट्रैक के ऊपर से अलग रास्ता मिल जाता है और वाहनों को बार-बार रेलवे फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ता।
समीक्षा में सामने आया कि राज्य में कुल 58 आरओबी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनमें से 47 परियोजनाएं पूर्व मध्य रेलवे से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए रेलवे और राज्य की निर्माण एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर विशेष जोर दिया गया है। कई परियोजनाओं में रेलवे की ओर से तकनीकी अनुमति, ट्रैफिक ब्लॉक, बिजली और सिग्नल से जुड़े काम तथा डिजाइन की मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
समीक्षा बैठक में यह भी देखा गया कि कुछ परियोजनाओं की रफ्तार तकनीकी स्वीकृतियों और रेलवे से जुड़े कार्यों के कारण प्रभावित हो रही है। अधिकारियों को ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने को कहा गया है। डिजाइन और ड्राइंग तैयार करने में लगने वाले समय को कम करने के लिए संबंधित एजेंसियों में तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
बिहार में आरओबी परियोजनाओं का असर केवल यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। रेलवे क्रॉसिंग पर जाम कम होने से आसपास के शहरों और कस्बों में रोजाना आने-जाने वाले लोगों को समय की बचत हो सकती है। एंबुलेंस, स्कूल बस, सार्वजनिक परिवहन और मालवाहक वाहनों के लिए भी ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। रेलवे फाटक के बार-बार बंद होने से होने वाली देरी को कम करने में ओवरब्रिज मददगार हो सकते हैं।
पटना में मिथापुर-परसा मार्ग पर बन रहे आरओबी को भी इसी तरह की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया है। इस परियोजना का निर्माण पटना जंक्शन और परसा बाजार रेलवे स्टेशनों के बीच किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना के मुख्य ढांचे का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
इसके अलावा सीतामढ़ी के मेहसौल आरओबी सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति पर भी प्रशासन और संबंधित विभाग नजर बनाए हुए हैं। अलग-अलग परियोजनाओं के लिए उनकी स्थिति और काम की गति के अनुसार समयसीमा निर्धारित की गई है। सीतामढ़ी में अधिकारियों ने लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
राज्य सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल ओवरब्रिज का निर्माण पूरा करना पर्याप्त नहीं होगा। उससे जुड़े एप्रोच रोड और कनेक्टिविटी के काम भी समय पर पूरे करने होंगे। यदि ओवरब्रिज तैयार हो जाए लेकिन उससे जुड़ने वाली सड़क का काम अधूरा रहे तो आम लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाएगी। इसलिए परियोजना के सभी हिस्सों को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
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