Last updated: September 18th, 2026 at 03:01 pm

बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने आगे की न्यायिक कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग वाली अंतरिम अर्जी खारिज कर दी।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि जिन कृत्यों को लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनका उनके आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन से उचित संबंध दिखाई नहीं देता। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल अंतरिम राहत के सवाल तक सीमित हैं और ट्रायल कोर्ट मामले की सुनवाई कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से करेगा।
19 सितंबर को आरोप तय करने की प्रक्रिया का था प्रस्ताव
हेमंत सोरेन ने क्रिमिनल रिवीजन के साथ अंतरिम आवेदन दाखिल कर ECIR केस नंबर 06/2023 में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। उनकी ओर से दलील दी गई थी कि अभियोजन के लिए जरूरी पूर्व स्वीकृति यानी सैंक्शन उपलब्ध नहीं है।
रांची की विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। मामले में ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
सैंक्शन को लेकर क्या थी दलील?
सोरेन की ओर से तर्क दिया गया कि मामला 1 जुलाई 2024 से पहले की लंबित कार्यवाही से संबंधित है, इसलिए BNSS की बचत व्यवस्था के तहत CrPC की धारा 197 लागू होनी चाहिए। उनका कहना था कि राज्यपाल से अभियोजन की मंजूरी मांगी गई थी, लेकिन उस पर कोई आदेश उन्हें नहीं मिला है।
वहीं, ED की ओर से BNSS की धारा 218 लागू होने की दलील दी गई। एजेंसी का पक्ष था कि निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने की स्थिति में सैंक्शन को ‘डीम्ड’ माना जा सकता है।
अदालत ने कहा कि धारा 197 के तहत संरक्षण तभी लागू होता है जब कथित कृत्य का सरकारी कर्मचारी के आधिकारिक दायित्व से उचित और वास्तविक संबंध हो। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि मौजूदा मामले में लगाए गए आरोपों का ऐसा संबंध स्पष्ट नहीं है।
सैंक्शन का प्रश्न कानून और तथ्य का मिश्रित विषय भी हो सकता है, जिस पर ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर विचार किया जा सकता है।
8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
ED की जांच के अनुसार, मामला रांची के बड़गाईं इलाके में 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और कब्जे से जुड़ा है। जांच में राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और दस्तावेजों में बदलाव के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
ED के रिकॉर्ड के मुताबिक, 29 जनवरी 2024 की तलाशी में 36.34 लाख रुपये नकद, एक BMW कार और कुछ दस्तावेज जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी ने जमीन से जुड़े मामले में सोरेन की भूमिका को लेकर आरोप लगाए हैं, जबकि सोरेन की ओर से इन आरोपों से इनकार किया गया है।
सोरेन ने आरोपों को नकारा
ED का आरोप है कि सोरेन ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल जमीन से जुड़ी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया। दूसरी ओर, सोरेन की ओर से कहा गया है कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता और उनकी भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
हाई कोर्ट ने इन दलीलों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने अंतरिम अर्जी खारिज करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियों से ट्रायल कोर्ट प्रभावित नहीं होगा और निचली अदालत मामले की सुनवाई कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से करेगी।
14 अक्टूबर को फिर सूचीबद्ध होगा मामला
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, हेमंत सोरेन की क्रिमिनल रिवीजन संख्या 982/2026 से संबंधित कार्यवाही को दूसरी याचिका के साथ 14 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया जाना है। इससे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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