Last updated: September 20th, 2026 at 02:44 pm
दिल्ली में डीटीसी के लिए काम करने वाले संविदा ड्राइवरों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रही। 15 सितंबर से शुरू हुई इस हड़ताल का असर राजधानी की बस सेवाओं पर लगातार दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां जैसे प्रमुख बस टर्मिनलों पर भी यात्रियों की परेशानी बढ़ी है। कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मेट्रो, ऑटो और कैब जैसे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
हड़ताल का मुख्य मुद्दा संविदा ड्राइवरों की मजदूरी और सुविधाओं से जुड़ा है। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें मौजूदा व्यवस्था में पर्याप्त वेतन नहीं मिल रहा है। यूनियन की ओर से दैनिक वेतन को बढ़ाकर 2,000 रुपये करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा चिकित्सा सुविधा, सामाजिक सुरक्षा, बीमा, छुट्टी, बोनस और सरकारी अवकाश के भुगतान जैसी मांगें भी रखी गई हैं। ड्राइवरों ने दुर्घटना या बस को नुकसान पहुंचने की स्थिति में वेतन से होने वाली कटौती को लेकर भी आपत्ति जताई है।
हड़ताल के बीच बस संचालन पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डीटीसी ने अपने संविदा और स्थायी ड्राइवरों में से करीब 2,693 ड्राइवरों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग डिपो में अस्थायी रूप से तैनात किया है। इसके अलावा यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए अन्य सार्वजनिक परिवहन विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार करीब 60 प्रतिशत डीटीसी बसें सड़कों पर चल रही थीं, लेकिन कई इलाकों में बसों की उपलब्धता सामान्य से कम रही।
सरकार और बस संचालकों के बीच बातचीत के जरिए गतिरोध दूर करने की कोशिश भी की गई है। परिवहन विभाग की ओर से कहा गया है कि ड्राइवरों की कई मांगों पर चर्चा आगे बढ़ी है, जबकि वेतन वृद्धि के मुद्दे पर श्रम विभाग की राय का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि संविदा ड्राइवर सीधे डीटीसी के नियमित कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि निजी एजेंसियों या संचालकों के माध्यम से काम करते हैं।
यात्रियों पर इसका असर खासतौर पर उन इलाकों में दिखाई दे रहा है जहां डीटीसी बसें दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन हैं। यमुनापार और कुछ अन्य क्षेत्रों में बसों की संख्या कम होने से लोगों को वैकल्पिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां जैसे इंटरस्टेट बस टर्मिनलों पर बाहर से आने-जाने वाले यात्रियों को भी अतिरिक्त इंतजार और वैकल्पिक साधनों के खर्च का सामना करना पड़ा।
हड़ताल के दौरान बसों की सुरक्षा को लेकर भी एक नया विवाद सामने आया। संविदा ड्राइवरों के संगठन ने बवाना डिपो के सेक्टर-5 वर्कशॉप से एक ऐसी बस के संचालन का आरोप लगाया जिसका विंडशील्ड टूटा हुआ था। संगठन ने मांग की कि क्षतिग्रस्त बसों को सड़क पर भेजे जाने की जांच की जाए। इस मामले में डीटीसी की ओर से संबंधित concessionaire को मामले को देखने के लिए कहा गया है।
वेतन और अन्य सुविधाओं को लेकर कर्मचारियों तथा बस संचालकों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। हड़ताल के कारण कुछ मार्गों पर बसों की उपलब्धता प्रभावित है और यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तथा खर्च का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में श्रम विभाग की राय और सरकार, बस संचालकों तथा कर्मचारियों के बीच होने वाली बातचीत से यह तय होगा कि बस सेवाएं पूरी तरह सामान्य कब होती हैं।
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