Last updated: September 20th, 2026 at 02:50 pm

दिल्ली हाईकोर्ट में सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 51 हो जाएगी। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 60 स्वीकृत पद हैं। इन नियुक्तियों के साथ अदालत में रिक्त पदों की संख्या में कमी आएगी।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के लिए सात न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इनमें निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं संजय शर्मा, भारत पराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है।
इन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर 2026 को की थी। कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के लिए कुल आठ न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी। इनमें से सात नामों को नियुक्ति की मंजूरी मिली है, जबकि आठवें नाम पर फिलहाल फैसला लंबित है।
नवनियुक्त न्यायाधीशों में से दो को सीधे स्थायी न्यायाधीश का दर्जा दिया गया है। निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना अब दिल्ली हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगी। पांच अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया है। अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त अधिकारियों में संजय शर्मा, भारत पराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं।
अरुण भारद्वाज फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत रहे हैं। वहीं भारत पराशर सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के पद से जुड़े रहे हैं। इन नियुक्तियों के जरिए न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारियों को हाईकोर्ट स्तर पर नई जिम्मेदारी मिली है।
दिल्ली हाईकोर्ट में जजों की स्वीकृत क्षमता 60 है, जबकि नियुक्तियों से पहले अदालत में 44 न्यायाधीश कार्यरत थे। सात नई नियुक्तियों के बाद यह संख्या 51 हो जाएगी। इससे अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ने की संभावना है, हालांकि मामलों के निपटारे पर इसका वास्तविक प्रभाव आगे की कार्यप्रणाली और न्यायिक भार पर निर्भर करेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट के लिए कॉलेजियम ने आठ नाम भेजे थे। आठवें नाम के रूप में गुरविंदर पाल सिंह की सिफारिश की गई थी, लेकिन उनकी नियुक्ति पर अभी मंजूरी नहीं मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका नाम खारिज नहीं किया गया है और मामला फिलहाल लंबित है।
दिल्ली के अलावा तीन अन्य हाईकोर्ट में भी इसी अधिसूचना के तहत नियुक्तियां की गई हैं। झारखंड हाईकोर्ट में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में यश पाल बॉर्नी को न्यायाधीश बनाया गया है। कर्नाटक हाईकोर्ट में ऊषारानी, के. एस. भरत कुमार और नेराले वी. भवानी को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। चारों हाईकोर्ट में कुल 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति हुई है।
दिल्ली हाईकोर्ट में सात नियुक्तियों के बाद अब सभी की नजर नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने की प्रक्रिया पर है। इसके साथ ही लंबित मामलों की सुनवाई और अदालत की न्यायिक क्षमता में होने वाले बदलाव पर भी ध्यान रहेगा।
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