Last updated: September 21st, 2026 at 03:31 pm

दिल्ली में सितंबर के अंत में वायु गुणवत्ता एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रविवार को पिछले 62 दिनों के मुकाबले सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया। मौसम में शुष्कता, हवा की कम रफ्तार और स्थानीय स्तर पर होने वाले प्रदूषण के कारण हवा में प्रदूषक कणों का फैलाव धीमा रहा। इसके चलते दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक बारिश की संभावना कम है। 21 से 25 सितंबर के बीच आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना जताई गई है। इसके बाद सप्ताहांत में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। राजधानी में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वापसी की तारीख 25 सितंबर मानी जाती है।
मौसम की स्थिति का सीधा असर वायु गुणवत्ता पर पड़ रहा है। बारिश नहीं होने से वातावरण में मौजूद धूल और दूसरे प्रदूषक कणों को हटाने में प्राकृतिक मदद कम हो जाती है। वहीं हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषक कण तेजी से फैल नहीं पाते और स्थानीय स्तर पर हवा में जमा रह सकते हैं। अधिकारियों ने भी हालिया गिरावट के पीछे बारिश की कमी, धीमी हवा और स्थानीय उत्सर्जन को प्रमुख कारणों में शामिल किया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 21 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के रिज क्षेत्र में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा। शहर के लिए 21 सितंबर को लगभग 34 डिग्री और अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार 22 और 23 सितंबर को भी मुख्य रूप से साफ आसमान रहने की संभावना है। 24 सितंबर को भी बारिश के बजाय मुख्य रूप से साफ मौसम रहने का अनुमान है। 25 सितंबर के बाद आंशिक रूप से बादल छाने की संभावना है, लेकिन तत्काल बड़े बारिश वाले दौर का संकेत नहीं दिया गया है।
बारिश और तेज हवा की कमी के कारण आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता पर मौसम का दबाव बना रह सकता है। हालांकि किसी दिन का AQI केवल मौसम पर निर्भर नहीं करता। वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां और अन्य स्थानीय उत्सर्जन भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसलिए अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर के लिए यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब मानसून की वापसी का दौर शुरू हो रहा है। सामान्य तौर पर सितंबर के अंतिम हिस्से में मानसूनी गतिविधियों में कमी आती है और बारिश के बीच अंतर बढ़ने लगता है। इससे वातावरण में मौजूद प्रदूषकों के फैलाव की परिस्थितियां भी बदलती हैं।
आने वाले दिनों में दिल्ली के तापमान और हवा की गति पर भी नजर रहेगी। यदि हवा की रफ्तार कम बनी रहती है और बारिश नहीं होती है, तो स्थानीय उत्सर्जन का प्रभाव वायु गुणवत्ता पर अधिक दिखाई दे सकता है। वहीं बारिश या हवा की गति बढ़ने की स्थिति में प्रदूषकों के फैलाव में बदलाव आ सकता है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान में अगले सप्ताह की शुरुआत तक दिल्ली में बड़े बारिश वाले दौर की संभावना नहीं बताई गई है। राजधानी में साफ और शुष्क मौसम के बीच तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। ऐसे मौसम में वायु गुणवत्ता पर स्थानीय प्रदूषण और हवा की स्थिति का प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।
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