Last updated: September 21st, 2026 at 03:42 pm

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बने मजुरहा-हरदिया पुल की एप्रोच रोड में उद्घाटन के महज 20 दिन बाद बड़ी दरार सामने आई है। सड़क के एक हिस्से में धंसाव भी दिखाई दे रहा है। नई बनी सड़क में इतनी जल्दी नुकसान सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मजुरहा और हरदिया के बीच बना यह आरसीसी पुल करीब 72 मीटर लंबा और 7.5 मीटर चौड़ा है। इसका उद्घाटन 1 सितंबर को बापूधाम महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया था। पुल के शुरू होने के बाद जिला मुख्यालय और आसपास के करीब 10 प्रखंडों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद जताई गई थी।
पुल के चालू होने के कुछ ही समय बाद एप्रोच रोड की स्थिति खराब होने की तस्वीरें सामने आईं। सड़क पर करीब 20 फीट लंबी दरार दिखाई दे रही है, जबकि एक हिस्सा नीचे की ओर धंसा हुआ नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों ने इतनी कम अवधि में सड़क की स्थिति खराब होने पर चिंता जताई है और मामले की तकनीकी जांच की मांग की है।
करीब 13 करोड़ रुपये की परियोजना में एप्रोच रोड का महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है। ऐसे में सड़क में जल्दी दरार आने के बाद निर्माण एजेंसी के काम और विभागीय निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि दरार और धंसाव का वास्तविक कारण क्या है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी जांच जरूरी होगी।
विशेषज्ञ जांच में सड़क की मिट्टी की भराई, बेस की मजबूती, कॉम्पैक्शन, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और जल निकासी व्यवस्था जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। मिट्टी के बैठने, सड़क के बेस में समस्या, जल निकासी से जुड़ी दिक्कत या किसी निर्माण संबंधी तकनीकी कमी के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुल बनने से पहले इस क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से बेहतर संपर्क मार्ग की आवश्यकता थी। पुल शुरू होने के बाद आसपास के लोगों को जिला मुख्यालय और दूसरे क्षेत्रों तक आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन एप्रोच रोड में शुरुआती नुकसान सामने आने के बाद अब लोगों का ध्यान इसकी मरम्मत के साथ-साथ समस्या के स्थायी समाधान पर है।
स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की ऊपरी मरम्मत करने के बजाय पूरे एप्रोच रोड की तकनीकी जांच कराई जाए। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि दरार केवल किसी एक हिस्से तक सीमित है या सड़क की संरचना में कहीं और भी समस्या मौजूद है।
मामले में निर्माण विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि तकनीकी जांच में निर्धारित मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं, यदि धंसाव का कारण मिट्टी या अन्य तकनीकी परिस्थिति निकलता है, तो उसके अनुसार स्थायी सुधार की प्रक्रिया अपनानी होगी।
करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल की एप्रोच रोड में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई दरार ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब तकनीकी जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क में इतनी जल्दी दरार और धंसाव क्यों आया तथा इसे स्थायी रूप से ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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