Last updated: September 22nd, 2026 at 12:18 pm

जमुई: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़खानी की घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। बिहार पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, नाबालिग की पहचान उजागर करने और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के मामले में अब तक 120 सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से घटना से जुड़े दो दर्जन से अधिक वीडियो टेकडाउन भी कराए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस ऐसे अन्य अकाउंट, पेज और वेबसाइटों की पहचान कर रही है, जहां नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट या शेयर की गई है।
वीडियो शेयर या रीपोस्ट करने से बचें
बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग से संबंधित किसी भी आपत्तिजनक वीडियो या फोटो को शेयर, रीपोस्ट या किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपलोड न करें। पुलिस का कहना है कि ऐसी सामग्री को आगे फैलाने के बजाय संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या पुलिस को इसकी सूचना दी जानी चाहिए।
अगर किसी अकाउंट पर ऐसी सामग्री दिखाई देती है तो उसे डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट करने के बजाय प्लेटफॉर्म के Report विकल्प के जरिए शिकायत की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर साइबर सेल या पुलिस को भी इसकी जानकारी दी जा सकती है।
नाबालिग की पहचान उजागर करना पड़ सकता है भारी
किसी नाबालिग पीड़ित का नाम, चेहरा, पता, स्कूल, परिवार, मोहल्ला या ऐसी कोई भी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए, जिससे उसकी पहचान सामने आए।
पुलिस ने लोगों को विशेष रूप से सावधान किया है कि वीडियो या फोटो के साथ ऐसी जानकारी भी पोस्ट न करें, जिससे पीड़ित की पहचान का पता लगाया जा सके। POCSO Act की धारा 23 के तहत बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी के प्रकाशन पर रोक है।
तत्काल खतरा हो तो 112 पर करें संपर्क
अगर किसी महिला या बच्चे को तत्काल खतरा है या कोई घटना उसी समय हो रही है, तो पुलिस सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग का चेहरा दिखाने या उसकी पहचान उजागर करने वाली सामग्री को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर कानूनी मामला है। जमुई मामले में पुलिस ऐसे अकाउंट संचालकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
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