Last updated: September 23rd, 2026 at 01:47 pm

दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बुधवार, 23 सितंबर को आधिकारिक रूप से विदाई ले ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस बार मानसून सामान्य तारीख से दो दिन पहले दिल्ली से पीछे हट गया। 2002 के बाद यह राजधानी से मानसून की सबसे जल्दी वापसी बताई जा रही है। सामान्य तौर पर दिल्ली से मानसून की वापसी की तारीख 25 सितंबर मानी जाती है।
इस साल दिल्ली में मानसून का आगमन भी सामान्य समय से कुछ देर से हुआ था। IMD के अनुसार दिल्ली में मानसून 2 जुलाई को पहुंचा, जबकि सामान्य तौर पर इसके 27 जून के आसपास पहुंचने की उम्मीद रहती है। यानी मानसून इस बार राजधानी में करीब पांच दिन की देरी से पहुंचा। इसके बावजूद सीजन के दौरान दिल्ली में कुल बारिश सामान्य से अधिक दर्ज की गई।
सफदरजंग मौसम केंद्र पर 1 जून से 23 सितंबर तक 728.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सामान्य बारिश करीब 629.7 मिलीमीटर मानी जाती है। इस तरह इस अवधि में बारिश सामान्य से लगभग 16 प्रतिशत अधिक रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक यह बारिश सामान्य श्रेणी में आती है, क्योंकि सामान्य बारिश की निर्धारित सीमा में इस तरह का अंतर शामिल होता है।
मानसून की वापसी का ऐलान केवल बारिश की मात्रा के आधार पर नहीं किया जाता। इसके लिए वातावरण में नमी में कमी, लगातार बारिश की गतिविधि का रुकना और निचले स्तर के वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव जैसे कई मौसम संबंधी संकेतों को देखा जाता है। इन परिस्थितियों के अनुकूल होने के बाद IMD ने दिल्ली से मानसून की वापसी की घोषणा की है।
मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में अब बिल्कुल बारिश नहीं होगी। मानसून के आधिकारिक रूप से पीछे हटने के बाद भी स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि, दक्षिण-पश्चिम मानसून से जुड़ी नियमित बारिश का दौर अब समाप्ति की ओर है।
इस बीच दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में भी बदलाव देखने को मिला है। बुधवार सुबह राजधानी का AQI 151 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों में भी प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 19 सितंबर को AQI 118 था, जो 20 सितंबर को 160, 21 सितंबर को 169 और 22 सितंबर को 178 तक पहुंच गया था।
मौसम में बदलाव के साथ राजधानी में आने वाले दिनों में हवा और तापमान की स्थिति पर भी नजर रहेगी। मानसून के बाद बारिश और हवा की गति में बदलाव प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि सर्दियों की शुरुआत से पहले दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर तैयारियां भी तेज की जा रही हैं।
इस साल दिल्ली में मानसून की अवधि भी पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अलग रही। मानसून 2 जुलाई को आया और 23 सितंबर को इसकी आधिकारिक वापसी हो गई। इसके बावजूद कुल बारिश सामान्य से अधिक रही। इससे राजधानी में मानसून का मौसम देर से शुरू होने और अपेक्षाकृत जल्दी खत्म होने के साथ-साथ पर्याप्त बारिश वाला रहा।
दिल्ली के अलावा बुधवार को मानसून पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों से भी पीछे हटा। उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में भी मानसून की वापसी दर्ज की गई। IMD के अनुसार मानसून की वापसी की रेखा उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों से आगे बढ़ रही है।
दिल्ली में मौसम धीरे-धीरे मानसून के बाद के चरण की ओर बढ़ेगा। बारिश की नियमित गतिविधियां कम होने के साथ तापमान, हवा की गति और प्रदूषण का स्तर आने वाले दिनों में राजधानी के मौसम को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
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