Last updated: September 24th, 2026 at 08:17 am

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है। न्याय जरूर होगा।”
राहुल गांधी ने यह भी बताया कि वह गुरुवार शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर बढ़ा विवाद
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form-6 में बदलाव और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में फैसलों को लेकर जानकारी और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में SIR या किसी विशेष प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान का समय चुनाव आयोग से जुड़ी इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद का है। उन्होंने लिखा कि “संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है” और कहा कि “न्याय जरूर होगा।”
अब सबकी नजर राहुल गांधी की शाम 4 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर है, जिसमें वह SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर आगे क्या कहते हैं, यह स्पष्ट होगा।
SIR को लेकर पहले से चल रहा है विवाद
SIR के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूची के पुनरीक्षण और शुद्धीकरण की प्रक्रिया के रूप में देखता है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का उल्लेख किया गया है। यह आंकड़ा ड्राफ्ट रोल से जुड़ा है और इसे अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
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